उम्मीद

‘Ummeed’, a poem by Paritosh Kumar Piyush

(एक)

तुम्हारी यादों को ओढ़ता हूँ
तुम्हारी यादों को बिछाता हूँ
अपने लिहाफ़ में छोड़ रखता हूँ
तुम्हारे हिस्से की पूरी जगह

तुम्हारी चुप्पी टूटने की
टूटती उम्मीद में काट लेता हूँ मैं
इस सर्द मौसम में
अपने हिस्से की पूरी रात…

(दो)

कुछ फ़ासले
इसलिए भी ज़रूरी होते हैं
कि दुनिया में बची रहे
प्रेम की अपनी परिभाषा…

(तीन)

तुम्हारे लौटने की उम्मीद में
मैंने कुछ कविताएँ
बचा रखी हैं अपने अंतः में

काग़ज़ों का क्या भरोसा…

(चार)

नफ़रत की कोई ठोस वजह नहीं
हमारे फ़ासले के बीच
तुम्हारे लौट आने की जगह
हमेशा बची रहेगी

अपना ख़याल रखना…

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