‘Virasat’, a poem by Ankush Kumar

प्रेम मुझे विरासत में मिला,
मेरे पिता करते थे
माँ से बहुत प्रेम,
मेरे बच्चे देखते हैं मुझे
प्रेम में डूबे हुए
उनकी माँ के संग।
मेरे बच्चे
जब करेंगे टूटकर प्रेम अपने संगी से
तब मैं गर्व कर सकूँगा
कि मैं अपनी विरासत
अपने वंश तक पहुँचा पाया।

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अंकुश कुमार
अंकुश कुमार दिल्ली में रहते हैं, इंजीनियरिंग की हुई है और फिलहाल हिन्दी से लगाव के कारण हिन्दी ही से एम. ए. कर रहे हैं, साथ ही एक वेब पोर्टल 'हिन्दीनामा' नवोदित लेखकों को आगे लाने के लिये संचालित करते हैं।