मेरे लिए जीवन ही
जीवन का सर्वोपरि लक्ष्य था
बच्चों को जन्म मुझे ही देना था
हर माह धर्म भी मुझे ही निभाने थे
मिर्ची भरी अंगुलियों से
पीठ की नील भी मुझे ही खुजलानी थी
ऐसे में तुमसे प्रतिस्पर्धा
कहाँ से करती मैं?

तुमने कहा – तुम सुन्दर हो
मैं विज्ञापन-सुन्दरी हो गयी
तुम्हें यह भी रास नहीं आया

तुमने कहा- काया ग़ज़ब है तुम्हारी
मैं देह-विक्रेता हो गयी
भोगा सबने, पर कोई पास नहीं आया

तुमने कहा- आवाज़ प्यारी है तुम्हारी
मैं बड़बोली हो गयी
कहा सबने, सुना किसी ने नहीं

परम्परा से नहीं सीखा था मैंने
विरोध का कोई भी उचित तरीक़ा
जब-जब मैंने अपना मन बचाया
तो घर में घर को ही खोया पाया

क्या कोई जानता है
यह न्याय तंत्र किसने बनाया?

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राहुल बोयल
जन्म दिनांक- 23.06.1985; जन्म स्थान- जयपहाड़ी, जिला-झुन्झुनूं( राजस्थान) सम्प्रति- राजस्व विभाग में कार्यरत पुस्तक- समय की नदी पर पुल नहीं होता (कविता - संग्रह) नष्ट नहीं होगा प्रेम ( कविता - संग्रह) मैं चाबियों से नहीं खुलता (काव्य संग्रह) ज़र्रे-ज़र्रे की ख़्वाहिश (ग़ज़ल संग्रह) मोबाइल नम्बर- 7726060287, 7062601038 ई मेल पता- [email protected]

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