शाम होने पर
पक्षी लौटते हैं
पर वही नहीं जो गए थे

रात होने पर फिर से जल उठती है
दीपशिखा
पर वही नहीं जो कल बुझ गयी थी

सूखी पड़ी नदी भर जाती है
किनारों को दुलराता है जल
पर वही नहीं जो
बादल बनकर उड़ गया था

हम भी लौटेंगे
प्रेम में, कविता में, घर में,
जन्मान्तरों को पार कर
पर वही नहीं
जो यहाँ से उठकर गए थे।

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अशोक वाजपेयी
अशोक वाजपेयी समकालीन हिंदी साहित्य के एक प्रमुख साहित्यकार हैं। सामाजिक जीवन में व्यावसायिक तौर पर वाजपेयी जी भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक पूर्वाधिकारी है, परंतु वह एक कवि के रूप में ज़्यादा जाने जाते हैं। उनकी विभिन्न कविताओं के लिए सन् १९९४ में उन्हें भारत सरकार द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाज़ा गया। वाजपेयी महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के उपकुलपति भी रह चुके हैं। इन्होंने भोपाल में भारत भवन की स्थापना में भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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