कीर्ति चौधरी

कीर्ति चौधरी
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कीर्ति चौधरी (जन्म- 1 जनवरी, 1934, नईमपुर गाँव, उन्नाव ज़िला, उत्तर प्रदेश; मृत्यु- 13 जून, 2008, लंदन) तार सप्तक की मशहूर कवयित्री थी। साहित्य उन्हें विरासत में मिला था। उन्होंने "उपन्यास के कथानक तत्त्व" जैसे विषय पर शोध किया था।

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घर में अकेली औरत के लिए

तुम्हें भूल जाना होगा समुद्र की मित्रता और जाड़े के दिनों को जिन्हें छल्ले की तरह अँगुली में पहनकर तुमने हवा और आकाश में उछाला था, पंखों में बसन्त...
Suryakant Tripathi Nirala

बाहरी स्वाधीनता और स्त्रियाँ

अब वह समय नहीं रहा कि हम स्त्रियों के सामने वह रूप रक्खें, जिसके लिए गोस्वामी तुलसीदासजी ने 'चित्र-लिखे कपि देखि डेराती' लिखा है।...
Parveen Shakir

चाँद-रात

गए बरस की ईद का दिन क्या अच्छा था चाँद को देखके उसका चेहरा देखा था फ़ज़ा में 'कीट्स' के लहजे की नरमाहट थी मौसम अपने रंग...
saadat hasan manto

मुलाक़ाती

"आज सुबह आपसे कौन मिलने आया था?" "मुझे क्या मालूम मैं तो अपने कमरे में सो रहा था।" "आप तो बस हर वक़्त सोए ही रहते...
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क़र्ज़

मेरा बाप नंगा था मैंने अपने कपड़े उतार उसे दे दिए ज़मीन भी नंगी थी मैंने उसे अपने मकान से दाग़ दिया शर्म भी नंगी थी, मैंने उसे अपनी...
Girdhar Rathi

स्वगत

'Swagat' | a poem by Girdhar Rathi वही— जिसे भींच रहे हो मुट्ठी में लेकिन जो टूट-बिखर जाता है बार-बार— जीवन है। कभी रेत और कभी बर्फ़ कभी आँच और...
Saadat Hasan Manto

वह लड़की

सवा चार बज चुके थे लेकिन धूप में वही तमाज़त थी जो दोपहर को बारह बजे के क़रीब थी। उसने बालकनी में आकर बाहर...
Earth Woman

प्रेम का अबेकस (दूसरा भाग)

1 प्रेम से क्रोध तक आग से आश्रय तक विश्वास करने के विपरीत क्या है? उसके लायक़ भी कुछ नही जैसे चाँदी की एक शानदार सुई चमकती है सफ़ेद परिधि में प्रेम...

चट्टान को तोड़ो, वह सुन्दर हो जाएगी

चट्टान को तोड़ो वह सुन्दर हो जाएगी उसे तोड़ो वह और, और सुन्दर होती जाएगी अब उसे उठा लो रख लो कन्धे पर ले जाओ शहर या क़स्बे में डाल दो...
Faiz Ahmad Faiz

इन्तिसाब

आज के नाम और आज के ग़म के नाम आज का ग़म कि है ज़िन्दगी के भरे गुलसिताँ से ख़फ़ा ज़र्द पत्तों का बन ज़र्द पत्तों का बन जो मिरा...
Gopal Singh Nepali

प्रार्थना बनी रहीं

रोटियाँ ग़रीब की, प्रार्थना बनी रहीं! एक ही तो प्रश्न है रोटियों की पीर का पर उसे भी आसरा आँसुओं के नीर का राज है ग़रीब का,...
Mahadevi Verma

जाग तुझको दूर जाना

चिर सजग आँखें उनींदी, आज कैसा व्यस्त बाना! जाग तुझको दूर जाना! अचल हिमगिरि के हृदय में आज चाहे कम्प हो ले या प्रलय के आँसुओं में मौन...
Zafar Iqbal

अभी किसी के न मेरे कहे से गुज़रेगा

अभी किसी के न मेरे कहे से गुज़रेगा वो ख़ुद ही एक दिन इस दाएरे से गुज़रेगा भरी रहे अभी आँखों में उसके नाम की नींद वो...
Vinod Kumar Shukla

बोलने में कम से कम बोलूँ

बोलने में कम से कम बोलूँ कभी बोलूँ, अधिकतम न बोलूँ इतना कम कि किसी दिन एक बात बार-बार बोलूँ जैसे कोयल की बार-बार की कूक फिर चुप। मेरे अधिकतम...
Krishan Chander

दो फ़र्लांग लम्बी सड़क

Do Farlaang Lambi Sadak, a story by Krishan Chander कचहरियों से लेकर लॉ कॉलेज तक बस यही कोई दो फ़र्लांग लम्बी सड़क होगी। हर रोज़...
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टारगेट किलिंग

चूड़ी वाले के यहाँ मैं अभी स्टूल पर बैठी ही थी साथ की दुकान के आगे इक स्कूटर रुका गोली चली सब ने फ़क़ चेहरों के साथ मुड़के देखा एक लम्हे...
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जिस दिशा में मेरा भोला गाँव है

क्या बारिश के दिनों धोरों पर गड्डमड्ड होते हैं बच्चे क्या औरतों के ओढ़नों से झाँकता है गाँव क्या बुज़ुर्गों की आँखों में बचा है काजल क्या स्लेट...
Abraham Lincoln, Mary Owens

अब्राहिम लिंकन का पत्र मेरी ऑवेंस के नाम

यह पत्र लिंकन ने राष्ट्रपति बनने से बहुत पूर्व अपनी युवावस्था में लिखा था। स्प्रिंग-फ़ील्ड, 7 मई, 1837 मित्र मेरी, प्रस्तुत पत्र से पहले मैंने दो चिट्ठियाँ लिखनी आरम्भ...
Malkhan Singh

मैं आदमी नहीं हूँ

1 मैं आदमी नहीं हूँ स्साब जानवर हूँ दोपाया जानवर जिसे बात-बात पर मनुपुत्र—माँ चो, बहन चो, कमीन क़ौम कहता है। पूरा दिन बैल की तरह जोतता है मुट्ठी-भर सत्तू मजूरी में देता है। मुँह...
Mahatma Gandhi - Dr Bhimrao Ambedkar

मेरे समकालीन: डॉ० भीमराव अम्बेडकर

डॉ० अम्बेडकर के प्रति और अछूतों का उद्धार करने की उनकी इच्छा के प्रति मेरा सद्भाव और उनकी होशियारी के प्रति आदर होने के...
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