हँसी और रुलाई
इतनी ही पास हैं
जितनी होठ की दूरी आँख से है

हम दोनों साथ रहते हैं
याद करने के लिए दूरी की ज़रूरत है

अक्सर चाय में चीनी डालना भूल जाती है
किसी को याद करने का नायाब तरीका है

बचपन में नमक का स्वाद चखती थी
वह प्रेम की तरह स्वादहीन नहीं होता

याद और रात सगी बहने हैं
जब भी आती है साथ आती है।

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