हुस्न पर ऐतबार हद कर दी
हुस्न पर ऐतबार हद कर दी
आप ने भी 'फ़िगार', हद कर दी
आदमी शाहकार-ए-फ़ितरत है
मेरे परवर-दिगार, हद कर दी
शाम-ए-ग़म सुब्ह-ए-हश्र तक पहुँची
ऐ शब-ए-इंतिज़ार, हद कर...
सारे उश्शाक़ से हम अच्छे हैं
सारे उश्शाक़ से हम अच्छे हैं
हाँ तिरे सर की क़सम अच्छे हैं
उलझा ही रहने दो ज़ुल्फ़ों को सनम
जो न खुल जाएँ भरम अच्छे हैं
कोई...
क्या आए तुम जो आए घड़ी दो घड़ी के बाद
क्या आए तुम जो आए घड़ी दो घड़ी के बाद
सीने में होगी साँस अड़ी दो घड़ी के बाद
क्या रोका अपने गिर्ये को हम ने...
बात कुछ हम से बन न आई आज
बात कुछ हम से बन न आई आज
बोल कर हम ने मुँह की खाई आज
चुप पर अपनी भरम थे क्या क्या कुछ
बात बिगड़ी बनी...
न सही आप हमारे जो मुक़द्दर में नहीं
न सही आप हमारे जो मुक़द्दर में नहीं
अब वो पहली सी तड़प भी दिल-ए-मुज़्तर में नहीं
आप की बात की वक़अत नहीं असलन दिल में
आप...
बोल दूँ जब झूठ
बोल दूँ जब झूठ, मुझको ठीक समझा जाए है
कह दिया सच, तो मुझे हैरत से देखा जाए है
आँख तुमने बंद कर ली, अब कबूतर...
कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता
कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता
तुम न होते न सही ज़िक्र तुम्हारा होता
तर्क-ए-दुनिया का ये दावा है फ़ुज़ूल ऐ ज़ाहिद
बार-ए-हस्ती तो ज़रा...
साँस लेते हुए भी डरता हूँ
साँस लेते हुए भी डरता हूँ
ये न समझें कि आह करता हूँ
बहर-ए-हस्ती में हूँ मिसाल-ए-हबाब
मिट ही जाता हूँ जब उभरता हूँ
इतनी आज़ादी भी ग़नीमत...
आपसे एक बात ज़ाहिर है
आपसे एक बात ज़ाहिर है,
ज़िन्दगी आपकी मुसाफ़िर है।
रखता है आपसे वही रंजिश,
कहता जो आपको बिरादिर है।
तुम सँभल कर चलो रक़ीबों से,
दूसरा नाम उनका शातिर...
आप ने क़द्र कुछ न की दिल की
'Aapne Qadr Kuchh Na Ki Dil Ki'
a ghazal by Hasrat Mohani
आप ने क़द्र कुछ न की दिल की
उड़ गई मुफ़्त में हँसी दिल की
ख़ू...
सोहबत-ए-ग़ैर-मूं जाया न करो
सोहबत-ए-ग़ैर-मूं जाया न करो
दर्द-मंदाँ कूँ कुढ़ाया न करो
हक़-परस्ती का अगर दावा है
बे-गुनाहाँ कूँ सताया न करो
अपनी ख़ूबी के अगर तालिब हो
अपने तालिब कूँ जलाया...
जिसके सम्मोहन में पागल धरती है आकाश भी है
जिसके सम्मोहन में पागल धरती है, आकाश भी है
एक पहेली-सी दुनिया ये गल्प भी है, इतिहास भी है
चिंतन के सोपान पे चढ़कर चाँद-सितारे छू...















