‘Adla Badli’, a short story by Kahlil Gibran

एक ग़रीब कवि की एक बार शहर के एक चौराहे पर एक धनी मूर्ख से मुलाक़ात हो गई। उन्होंने बहुत-सी बातें कीं लेकिन सबकी सब बेमतलब।

तभी उस सड़क का फ़रिश्ता उधर से गुज़रा। उसने उन दोनों के कन्धों पर अपने हाथ रखे। एक चमत्कार हुआ- दोनों के विचार आपस में बदल गए।

इसके बाद वे अपने-अपने रास्ते चले गए।

चमत्कार हुआ।

कवि ने रेत देखी। उसे मुठ्ठी में उठाया और धार बनकर उसमें से उसे रिसते देखता रहा।

और मूर्ख! अपनी आँखें बन्दकर बैठ गया; लेकिन अनुभव कुछ न कर सका हृदय में घुमड़ते बादलों के सिवा।

यह भी पढ़ें: खलील जिब्रान की लघुकथा ‘चतुर कुत्ता’

Book by Kahlil Gibran:

Previous articleचंद्रेश्वर कृत ‘सामने से मेरे’
Next articleएक बूँद
खलील जिब्रान
खलील जिब्रान (6 जनवरी, 1883 – 10 जनवरी, 1931) एक लेबनानी-अमेरिकी कलाकार, कवि तथा न्यूयॉर्क पेन लीग के लेखक थे। उन्हें अपने चिंतन के कारण समकालीन पादरियों और अधिकारी वर्ग का कोपभाजन होना पड़ा और जाति से बहिष्कृत करके देश निकाला तक दे दिया गया था। आधुनिक अरबी साहित्य में जिब्रान खलील 'जिब्रान' के नाम से प्रसिद्ध हैं, किंतु अंग्रेजी में वह अपना नाम खलील ज्व्रान लिखते थे और इसी नाम से वे अधिक प्रसिद्ध भी हुए।