Poem: Harlem by Langston Hughes
Translation: Arjita Mital

क्या होता है जब कोई सपना अधूरा रह जाता है?

क्या वह धूप में रखी
किशमिश की तरह मुरझा जाता है?
या फिर पुरानी चोट की तरह
पककर नासूर बन जाता है?
क्या उसमें से सड़े माँस जैसी बू भी आने लगती है?
या फिर सूखकर पपड़ी बन जाता है—
चाशनी-भरी मिठाई की तरह…

शायद वह धँस जाता है
किसी भारी वज़न की तरह।

या फिर वह फट पड़ता है?

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