Tag: स्वप्न / ख़्वाब

Pallavi Mukherjee

कविताएँ: अगस्त 2020

सुनो मछुआरे सुनो मछुआरे जितने जुगनू तुम्हारी आँखों में चमक रहे हैं न टिम-टिम तारों के जैसे, वे क्या हमेशा चमकते रहते हैं इसी तरह?सुनो मछुआरे जब तुम जाल फेंकते हो सागर में, तुम्हारी बाँहों की मछलियाँ मचल-मचल...
Leaf Water River

नदी, स्वप्न और तुम्हारा पता

मैं जग रहा हूँ आँखों में गाढ़ी-चिपचिपी नींद भरे कि नींद मेरे विकल्पों की सूची में खो गयी है कहीं।जिस बिस्तर पर मैं लेटा चाहे-अनचाहे मेरी उपस्थिति...
Parveen Shakir

इतना मालूम है

अपने बिस्तर पे बहुत देर से मैं नीम-दराज़ सोचती थी कि वो इस वक़्त कहाँ पर होगा मैं यहाँ हूँ मगर उस कूचा-ए-रंग-ओ-बू में रोज़ की तरह...
Chandrakant Devtale

एक सपना यह भी

सुख से, पुलकने से नहीं रचने-खटने की थकान से सोयी हुई है स्त्रीसोयी हुई है जैसे उजड़कर गिरी सूखे पेड़ की टहनी अब पड़ी पसरकरमिलता जो सुख वह...
Narendra Jain

कुल्हाड़ी

यहाँ लकड़ी कटती है लगातार थोड़ा-थोड़ा आदमी भी कटता हैकिसी की उम्र कट जाती है और पड़ी होती धूल में टुकड़े की तरहशोर से भरी इस गली में कहने...
Pankaj Singh

वह इच्छा है मगर इच्छा से कुछ और अलग

वह इच्छा है मगर इच्छा से कुछ और अलग इच्छा है मगर इच्छा से ज़्यादा और आपत्तिजनक मगर ख़ून में फैलती रोशनी के धागों-सी आत्मा में जड़ें...
Dream

कमाल का स्वप्न, नींद, प्रतीक्षारत

कमाल का स्वप्न जीवन के विषय में पूछे जाने पर दृढ़ता से कह सकता हूँ मैंकमाल का स्वप्न था..जैसा देखा, हुआ नहीं जैसा हुआ, देखा नहीं! नींद कहानी सुनाकर दादी...
Langston Hughes

लैंग्स्टन ह्यूज की कविता ‘हारलम’

Poem: Harlem by Langston Hughes Translation: Arjita Mitalक्या होता है जब कोई सपना अधूरा रह जाता है?क्या वह धूप में रखी किशमिश की तरह मुरझा जाता...
Shankaranand

पसीने की गन्ध

कुछ बातें देर तक गूँजती हैं बिना पहाड़ और दीवार से टकराएशोर में वे चुपके-से अपनी जगह बना लेती हैं और बच जाती हैं हमेशा के लिएबहुत से...
Fish Eyes, Boy, Girl, Abstract

स्वप्न में पूछा तुमने

'Swapn Mein Poochha Tumne', a poem by Rag Ranjanस्वप्न में पूछा तुमने क्या कहोगे मुझसे आख़िरी बार हो यही बस एक मुलाक़ात फिर ना मिलना हो यदि...
Rahul Boyal

वास्तु, स्वप्न और प्रेम

'Vastu, Swapn Aur Prem', Hindi Kavita by Rahul Boyalअपने घर का दरवाज़ा पूरब की ओर खुलता है मुझे सूरज इसी दरवाज़े पर मिलता है रोज़ जब...
Shahbaz Rizvi

ख़्वाब

'Khwab', a poem by Shahbaz Rizviसुब्ह दम ख़्वाब के हिसार में सोया हुआ बच्चा जब अपने हाथ से तारों के चेहरे को छुपाता है जब अपनी जेब...

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Daisy Rockwell - Geetanjali Shree

डेज़ी रॉकवेल के इंटरव्यू के अंश

लेखक ने अपनी बात कहने के लिए अपनी भाषा रची है, इसलिए इसका अनुवाद करने के लिए आपको भी अपनी भाषा गढ़नी होगी। —डेज़ी...
Kalam Ka Sipahi - Premchand Jeevani - Amrit Rai

पुस्तक अंश: प्रेमचंद : कलम का सिपाही

भारत के महान साहित्यकार, हिन्दी लेखक और उर्दू उपन्यासकार प्रेमचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। प्रेमचंद ने अपने जीवन काल में कई रचनाएँ...
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प्रिया सारुकाय छाबड़िया एक पुरस्कृत कवयित्री, लेखिका और अनुवादक हैं। इनके चार कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जिनमें नवीनतम 'सिंग ऑफ़ लाइफ़ रिवीज़निंग...
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हम पृथ्वी की शुरुआत से स्त्री हैं सरकारें बदलती रहीं तख़्त पलटते रहे हम स्त्री रहे विचारक आए विचारक गए हम स्त्री रहे सैंकड़ों सावन आए अपने साथ हर दूषित चीज़ बहा...
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