‘Kavita Ek Chaku Hai’, a poem by Nand Kishore Acharya

[‘केवल एक पट्टी ने’ संग्रह से]

दर्पण नहीं है वह
जब चाहा देख लिया
अपना चेहरा जाकर

फूल भी नहीं वह कोई
रँगो-बू में जिसकी
डूबे ही रहो दिन-रात

कोई खिलौना भी नहीं
चाबी भरते ही चलने लगे
मन बहलाने की ख़ातिर

कविता एक चाकू है
गहरे तक धँसा
आत्मा में-
न मुमकिन रख पाना
जिसको,
निकालना
मर जाना निश्चय।

यह भी पढ़ें: नंदकिशोर आचार्य का वक्तव्य ‘कविता का कोई अर्थ नहीं है’

Book by Nand Kishore Acharya:

Previous articleमैं तुझे फिर मिलूँगी
Next articleनामुराद औरत
नंदकिशोर आचार्य
नंदकिशोर आचार्य (३१ अगस्त १९४५) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। इनका जन्म बीकानेर में हुआ। तथागत (उपन्यास), अज्ञेय की काव्य तितीर्षा, रचना का सच और सर्जक का मन (आलोचना) देहांतर और पागलघर (नाटक), शब्द भूले हुए, आती है मृत्यु (कविता संग्रह) उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी के सर्वोच्च मीरा पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here