सुरक्षित बाड़

जब वह घूमती है
अपनी घर की चारदीवारी में
जैसे,
वह संसार की सबसे सुरक्षित बाड़ हो

तब मैं
उस बाड़ की समीप से टोह लेने लगती हूँ
कि अब
इसके अधिक मज़बूत होने की सम्भावना
कितनी और बाक़ी बची हुई है!

अप्राप्य बचपन

किशोरावस्था पर इल्ज़ाम है
जल्दी वयस्क हो जाने का

मैं पूछती हूँ…

कभी ख़ुद से पूछा है
क्या उन्हें पूरा बचपन मिला था कभी!

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मंजुला बिष्ट
बीए. बीएड. गृहणी, स्वतंत्र-लेखन कविता, कहानी व आलेख-लेखन में रुचि उदयपुर (राजस्थान) में निवासइनकी रचनाएँ हंस, अहा! जिंदगी, विश्वगाथा, पर्तों की पड़ताल, माही व स्वर्णवाणी पत्रिका, दैनिक-भास्कर, राजस्थान-पत्रिका, सुबह-सबेरे, प्रभात-ख़बर समाचार-पत्र व हस्ताक्षर, वेब-दुनिया वेब पत्रिका व हिंदीनामा पेज़, बिजूका ब्लॉग में भी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं।

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