प्यार करने के लिए
मेरे पास चार शब्द थे
घर, तुम, मैं और मुल्क
और इनके भी अपने प्रारब्ध थे।

घर बचाने के लिए
तेरे शहर किराये पर रहना पड़ा
घर छूट गया
तुमसे निभाने के लिए
ख़ुद से ही लड़ना पड़ा
और मैं टूट गया

मुल्क के ऐतिहासिक सौन्दर्य पर
हमारे भविष्य स्तब्ध थे
स्वप्नों का शब्दकोश बहुत बड़ा था
पर मेरे पास चार ही शब्द थे
और इनके भी अपने ही प्रारब्ध थे।

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राहुल बोयल
जन्म दिनांक- 23.06.1985; जन्म स्थान- जयपहाड़ी, जिला-झुन्झुनूं( राजस्थान) सम्प्रति- राजस्व विभाग में कार्यरत पुस्तक- समय की नदी पर पुल नहीं होता (कविता - संग्रह) नष्ट नहीं होगा प्रेम ( कविता - संग्रह) मैं चाबियों से नहीं खुलता (काव्य संग्रह) ज़र्रे-ज़र्रे की ख़्वाहिश (ग़ज़ल संग्रह) मोबाइल नम्बर- 7726060287, 7062601038 ई मेल पता- [email protected]

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