कोई शब्द विलोम नहीं होता
किसी शब्द का
वह अपना आप होता है
जब तक बलात् तुम उसे
दूसरे से भिड़ाओ नहीं

कविता भिड़ाती नहीं
साथ-साथ करती है
शब्दों को
—उनको भी
विलोम कह देते हैं जिनको—
हो सकें सम्पन्नतर दोनों
परस्पर

हर कविता
—इसलिए बस—
प्रेम-कविता है।

Book by Nand Kishore Acharya:

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नंदकिशोर आचार्य
नंदकिशोर आचार्य (३१ अगस्त १९४५) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। इनका जन्म बीकानेर में हुआ। तथागत (उपन्यास), अज्ञेय की काव्य तितीर्षा, रचना का सच और सर्जक का मन (आलोचना) देहांतर और पागलघर (नाटक), शब्द भूले हुए, आती है मृत्यु (कविता संग्रह) उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी के सर्वोच्च मीरा पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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