चयन: अनुराग तिवारी

स्त्रियाँ घर लौटती हैं
पिता
डोरी पर घर
पिता की याद
पेंसिल की तरह बरती गयीं घरेलू स्त्रियाँ
उस दिन भी, ऊन, भोर उगाता हूँ, माँ को ख़त

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