Tag: जाति

Om Prakash Valmiki

अँधेरे में शब्द

रात गहरी और काली है अकालग्रस्त त्रासदी जैसी जहाँ हज़ारों शब्द दफ़न हैं इतने गहरे कि उनकी सिसकियाँ भी सुनायी नहीं देतीं समय के चक्रवात से भयभीत होकर मृत शब्द को पुनर्जीवित करने...
Om Prakash Valmiki

कोई ख़तरा नहीं

शहर की सड़कों पर दौड़ती-भागती गाड़ियों के शोर में सुनायी नहीं पड़तीं सिसकियाँ बोझ से दबे आदमी की जो हर बार फँस जाता है मुखौटों के भ्रमजाल में जानते हुए भी...
Om Prakash Valmiki

मुट्ठी भर चावल

अरे, मेरे प्रताड़ित पुरखों तुम्हारी स्मृतियाँ इस बंजर धरती के सीने पर अभी ज़िन्दा हैं अपने हरेपन के साथ तुम्हारी पीठ पर चोट के नीले गहरे निशान तुम्हारे साहस और धैर्य को भुला...

परती ज़मीन

'Parti Zameen', a story by Boya Jangaiah अनुवाद - डॉ. सना छह-सात सौ घरों के उस गाँव में ज़्यादातर लोगों की ज़िन्दगी मेहनत-मज़दूरी पर निर्भर है।...
Arjun Dangle

बुद्ध ही मरा पड़ा है

अनुवाद: शिवदत्ता वावळकर वह सम्पत को बैठक से बाहर लाया। बैठक में थोड़ी-सी हलचल मची। साँस छोड़कर वह सम्पत के कान में बोला, "तुम्हें क्या लगता...
Baburao Bagul

जब मैंने जाति छुपाई

"महार होने से क्या हुआ? दीवार के सामने पड़ी टट्टी-पेशाब की गन्दगी साफ़ नहीं करूँगा।" "तुम्हें करनी होगी और बराबर साफ़ करनी होगी।"
Angara - Kusum Meghwal

अंगारा

"हरखू और झमकू को कहते कि अपनी बिटिया को सँभालकर रखे तो उल्टे हमारा ही मुँह बन्द करते कि मेरी लड़की तुम्हारी आँखों में क्यों चुभ रही है?" "अब भुगतो!"
Woman

सुमंगली

"ग़रीबों का जन्म ही इसलिए हुआ है। हमारी मेहनत से अट्टलिकाएँ तैयार होती हैं और उसके पुरस्कार के बदले में हमारे शरीर को रौंदा जाता है।"
Girl, Woman

उम्मीद अब भी बाकी है

"तुम्हारी माँ उतनी बुरी नहीं है", बाबा ने उस दिन शाम में कहा, "अभी भी वह हमसे उतना ही प्यार करती है, दो-चार रुपये के लिए उस पंजाबी से सम्बन्ध बनाया हो, यह अलग बात है।"
Chapakal

वैतरणी

मंगतू अपनी बस्ती में एक नल लगाने का आग्रह अपने क्षेत्र के विधायक से करता है, लेकिन उसकी इस फ़रियाद के पूर्ण होने के रास्ते में रुकावट हैं वैतरणी के तट पर खड़े विधायक के स्वर्गीय बड़े भैया!
People sitting and having food in village

लटकी हुई शर्त

"दुसाध को लड़की की शादी करनी है तो दुसाध ही खोजेगा। चमार को लड़की की शादी करनी है तो चमार ही खोजेगा। फिर, यह 'हरिजन-हरिजन' करने से इन बारीकियों का पता कैसे चलेगा?"
Suraj Pal Chauhan

परिवर्तन की बात

“हाँ भैया, गाय और अपनी माता में कोई फर्क नहीं होता।” “तो तुम इसका माँ की तरह दाह-संस्कार क्यों नहीं करते?” “साले खाल खींचा, यदि एक भी शब्द और आगे कहा तो पूरी लाठिया मुँह में घुसेड़ दूँगा।” “तुम्हीं तो मरे जानवर उठाने का काम करते आए हो। तुम नहीं करोगे, तो कौन करेगा इस काम को?” “कोई भी करे, अब हम नहीं करेंगे।”
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