Tag: विरोध

Pankaj Singh

मत कहना चेतावनी नहीं दी गई थी

आपसी सद्भाव से समाज में शान्ति रहती है शान्ति में ही सम्भव है प्रगति और विकास ये अच्छे विचार हैं कुछ लोगों के लिए फ़ायदेमन्द एक रेशेदार जीभ...
Adam Gondvi

तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है

तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है मगर ये आँकड़ें झूठे हैं, ये दावा किताबी है उधर जम्हूरियत का ढोल पीटे जा रहे हैं वो इधर...
Paash

मैं पूछता हूँ आसमान में उड़ते हुए सूरज से

मैं पूछता हूँ आसमान में उड़ते हुए सूरज से क्या वक़्त इसी का नाम है कि घटनाएँ कुचलती हुई चली जाएँ मस्त हाथी की तरह एक समूचे मनुष्य...
Raghuvir Sahay

स्वाधीन व्यक्ति

इस अन्धेरे में कभी-कभी दीख जाती है किसी की कविता चौंध में दिखता है एक और कोई कवि हम तीन कम-से-कम हैं, साथ हैं। आज हम बात कम, काम...
Habib Jalib

उट्ठो, मरने का हक़ इस्तेमाल करो

जीने का हक़ सामराज ने छीन लिया उट्ठो, मरने का हक़ इस्तेमाल करो! ज़िल्लत के जीने से मरना बेहतर है मिट जाओ या क़स्र-ए-सितम पामाल करो! सामराज के...
Devi Prasad Mishra

आवारा के दाग़ चाहिए

दो वक़्तों का कम से कम तो भात चाहिए गात चाहिए जो न काँपे सत्ता के सम्मुख जो कह दूँ बात चाहिए कि छिप जाने को रात...
Hafeez Merathi

आबाद रहेंगे वीराने, शादाब रहेंगी ज़ंजीरें

आबाद रहेंगे वीराने, शादाब रहेंगी ज़ंजीरें जब तक दीवाने ज़िंदा हैं, फूलेंगी-फलेंगी ज़ंजीरें आज़ादी का दरवाज़ा भी ख़ुद ही खोलेंगी ज़ंजीरें टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगी जब हद से...
Shrikant Verma

हस्तक्षेप

कोई छींकता तक नहीं इस डर से कि मगध की शांति भंग न हो जाए, मगध को बनाए रखना है तो मगध में शांति रहनी ही चाहिए मगध है, तो शांति...
Silent, Silence

इतिहास की कालहीन कसौटी

बन्‍द अगर होगा मन आग बन जाएगा, रोका हुआ हर शब्‍द चिराग़ बन जाएगा। सत्ता के मन में जब-जब पाप भर जाएगा झूठ और सच का सब अन्‍तर मिट जाएगा न्‍याय...
Pandey Bechan Sharma Ugra

उसकी माँ

दोपहर को ज़रा आराम करके उठा था। अपने पढ़ने-लिखने के कमरे में खड़ा-खड़ा धीरे-धीरे सिगार पी रहा था और बड़ी-बड़ी अलमारियों में सजे पुस्तकालय...
Fist, Protest, Dissent

वो घर तक आएँगे

सरेंडर-मार्च कराया जाए लोकतंत्र माई लार्ड न्याय की शर्त लगाएँ जब वर्दी हाँक रही संविधान लहराती मुठ्ठियाँ नहीं चलेंगी। चश्मे नहीं उतरने चाहिए आँख नहीं मींची जाएँ इस रात का अवसान...
Venu Gopal

वे हाथ होते हैं

दुश्मनों की ख़ुशी पर मुझे कुछ नहीं कहना है। दोस्तों की उदासी ही मुझसे यह कविता लिखवा रही है। जिन अँधेरे रास्तों पर सफ़र शुरू हुआ था, वे एकाएक राज-पथ...
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