Tag: विरोध
मत कहना चेतावनी नहीं दी गई थी
आपसी सद्भाव से समाज में शान्ति रहती है
शान्ति में ही सम्भव है प्रगति और विकास
ये अच्छे विचार हैं कुछ लोगों के लिए फ़ायदेमन्द
एक रेशेदार जीभ...
तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
तुम्हारी फ़ाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है
मगर ये आँकड़ें झूठे हैं, ये दावा किताबी है
उधर जम्हूरियत का ढोल पीटे जा रहे हैं वो
इधर...
मैं पूछता हूँ आसमान में उड़ते हुए सूरज से
मैं पूछता हूँ आसमान में उड़ते हुए सूरज से
क्या वक़्त इसी का नाम है
कि घटनाएँ कुचलती हुई चली जाएँ
मस्त हाथी की तरह
एक समूचे मनुष्य...
स्वाधीन व्यक्ति
इस अन्धेरे में कभी-कभी
दीख जाती है किसी की कविता
चौंध में दिखता है एक और कोई कवि
हम तीन कम-से-कम हैं, साथ हैं।
आज हम
बात कम, काम...
उट्ठो, मरने का हक़ इस्तेमाल करो
जीने का हक़ सामराज ने छीन लिया
उट्ठो, मरने का हक़ इस्तेमाल करो!
ज़िल्लत के जीने से मरना बेहतर है
मिट जाओ या क़स्र-ए-सितम पामाल करो!
सामराज के...
आवारा के दाग़ चाहिए
दो वक़्तों का कम से कम तो भात चाहिए
गात चाहिए जो न काँपे
सत्ता के सम्मुख जो कह दूँ
बात चाहिए कि छिप जाने को रात...
आबाद रहेंगे वीराने, शादाब रहेंगी ज़ंजीरें
आबाद रहेंगे वीराने, शादाब रहेंगी ज़ंजीरें
जब तक दीवाने ज़िंदा हैं, फूलेंगी-फलेंगी ज़ंजीरें
आज़ादी का दरवाज़ा भी ख़ुद ही खोलेंगी ज़ंजीरें
टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगी जब हद से...
हस्तक्षेप
कोई छींकता तक नहीं
इस डर से
कि मगध की शांति
भंग न हो जाए,
मगध को बनाए रखना है तो
मगध में शांति
रहनी ही चाहिए
मगध है, तो शांति...
इतिहास की कालहीन कसौटी
बन्द अगर होगा मन
आग बन जाएगा,
रोका हुआ हर शब्द
चिराग़ बन जाएगा।
सत्ता के मन में जब-जब पाप भर जाएगा
झूठ और सच का सब अन्तर मिट जाएगा
न्याय...
उसकी माँ
दोपहर को ज़रा आराम करके उठा था। अपने पढ़ने-लिखने के कमरे में खड़ा-खड़ा धीरे-धीरे सिगार पी रहा था और बड़ी-बड़ी अलमारियों में सजे पुस्तकालय...
वो घर तक आएँगे
सरेंडर-मार्च कराया जाए लोकतंत्र
माई लार्ड न्याय की शर्त लगाएँ
जब वर्दी हाँक रही संविधान
लहराती मुठ्ठियाँ नहीं चलेंगी।
चश्मे नहीं उतरने चाहिए
आँख नहीं मींची जाएँ
इस रात का अवसान...
वे हाथ होते हैं
दुश्मनों की ख़ुशी पर मुझे कुछ नहीं
कहना है। दोस्तों की
उदासी ही
मुझसे यह कविता लिखवा रही है।
जिन अँधेरे रास्तों पर सफ़र
शुरू हुआ था,
वे एकाएक राज-पथ...











