Tag: विरोध
अच्छी सरकार
यह बहुत अच्छी सरकार है
इसके एक हाथ में सितार, दूसरे में हथियार है
सितार बजाने और हथियार चलाने की
तजुर्बेकार है
इसका निशाना अचूक है
क़ानून की एड़ियों वाले...
हड़ताल का गीत
आज हम हड़ताल पर हैं।
हड्डियों से जो चिपककर रह गई, उस खाल पर हैं।
यह ख़बर सबको सुना दो
इश्तहारों में लगा दो
हम लड़ाई पर खड़े...
कविताएँ: अक्टूबर 2020
किसी रोज़
किसी रोज़
हाँ, किसी रोज़
मैं वापस आऊँगा ज़रूर
अपने मौसम के साथ
तुम देखना
मुझ पर खिले होंगे फूल
उगी होंगी हरी पत्तियाँ
लदे होंगे फल
मैं सीखकर आऊँगा
चिड़ियों की...
तप करके हम
तप करके हम
भोजपत्र पर लिखते रहे ऋचा,
कैसे लिखें वंदना
सिंहासन के पाए पर।
इधर क्रौंच की करुणा
हम को संत बनाती है,
उधर सियासत
निर्वसना होकर आ जाती है,
शब्द...
गोली दाग़ो पोस्टर
यह उन्नीस सौ बहत्तर की बीस अप्रैल है या
किसी पेशेवर हत्यारे का दायाँ हाथ या किसी जासूस
का चमड़े का दस्ताना या किसी हमलावर की दूरबीन...
एक दिन शिनाख़्त
एक दिन
हमसे पूछा जाएगा
हम क्या कर रहे थे?
एक दिन
हमसे पूछा जाएगा
हमारी नींद कितनी गहरी थी?
एक दिन
हमसे पूछा जाएगा
हमारी आवाज़ कौन छीनकर ले गया?
एक दिन
हमसे पूछा...
ईश्वर को सूली
मैंने चाहा था
कि चुप रहूँ,
देखता जाऊँ
जो कुछ मेरे इर्द-गिर्द हो रहा है।
मेरी देह में कस रहा है जो साँप
उसे सहलाते हुए,
झेल लूँ थोड़ा-सा संकट
जो...
हर ज़ोर-ज़ुल्म की टक्कर में
Har Zor Zulm Ki Takkar Mein | Shailendra
हर ज़ोर-ज़ुल्म की टक्कर में, हड़ताल हमारा नारा है!
तुमने माँगे ठुकरायी हैं, तुमने तोड़ा है हर वादा
छीनी हमसे...
रेखांकित हक़ीक़त
किसने कह दिया तुम्हें
कि मैं कविता लिखता हूँ
मैं कविता नहीं लिखता
मैंने तो सिर्फ़
जन-मन के दर्द के नीचे
एक रेखा खींच दी है
हाँ, दर्द के नीचे
फ़क़त...
देश काग़ज़ पर बना नक़्शा नहीं होता
यदि तुम्हारे घर के
एक कमरे में आग लगी हो
तो क्या तुम
दूसरे कमरे में सो सकते हो?
यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में
लाशें सड़ रही...
आज़ाद कवि
अपराधी-सा
जब उन्हें पकड़ा गया
वो हमेशा की तरह अपने कामों में व्यस्त थे,
लहूलुहान जंगल और नदी के ज़ख़्मों पर मलहम लगा
फूलों को सुरक्षित करने के...
ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के
ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गाँव के।
अब अँधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गाँव के।
कह रही है झोंपड़ी औ' पूछते हैं खेत भी
कब...











