Tag: विरोध

Habib Jalib

अपनी जंग रहेगी

जब तक चंद लुटेरे इस धरती को घेरे हैं अपनी जंग रहेगी अहल-ए-हवस ने जब तक अपने दाम बिखेरे हैं अपनी जंग रहेगीमग़रिब के चेहरे पर यारो...
Fist, Protest, Dissent

नया मोर्चा

फिर अपने जूतों के फीते कसने लगे हैं—लोग चील की छाया—गिद्ध बने उसके पहले ही भीतर का भय पोंछ ट्राम-बसों में सफ़र करते—ख़ामोश होंठ फिर हिलने लगे हैं।हवा के...
Farmers

वे बैठे हैं

वे बैठे हैं पलथी टिकाए आँख गड़ाएअपनी रोटी बाँधकर ले आए हैं, रखते हैं तुम्हारे सामने अपने घरों के चूल्हे, आश्वासन नहीं माँगते तुमसे माँगते हैं रोटी के बदले रोटीअपने...
Gaurav Bharti

कविताएँ: दिसम्बर 2020

1हॉस्टल के अधिकांश कमरों के बाहर लटके हुए हैं ताले लटकते हुए इन तालों में मैं आने वाला समय देख रहा हूँमैं देख रहा हूँ कमरों के भीतर अनियन्त्रित...
Balli Singh Cheema

रोटी माँग रहे लोगों से

रोटी माँग रहे लोगों से किसको ख़तरा होता है? यार सुना है लाठी-चारज, हल्का-हल्का होता है।सिर फोड़ें या टाँगें तोड़ें, ये क़ानून के रखवाले, देख रहे हैं...
Fight, Oppression, Beating

कायरों का गीत

शोर करोगे! मारेंगे बात कहोगे! मारेंगे सच बोलोगे! मारेंगे साथ चलोगे! मारेंगे ये जंगल तानाशाहों का इसमें तुम आवाज़ करोगे? मारेंगे...जो जैसा चलता जाता है, चलने दो दीन-धरम के नाम...
Vidrohi

जन-प्रतिरोध

जब भी किसी ग़रीब आदमी का अपमान करती है ये तुम्हारी दुनिया, तो मेरा जी करता है कि मैं इस दुनिया को उठाकर पटक दूँ! इसका गूदा-गूदा छींट जाए।मज़ाक़ बना...
Kedarnath Agarwal

प्रश्न

मोड़ोगे मन या सावन के घन मोड़ोगे? मोड़ोगे तन या शासन के फन मोड़ोगे? बोलो साथी! क्या मोड़ोगे?तोड़ोगे तृण या धीरज धारण तोड़ोगे? तोड़ोगे प्रण या भीषण शोषण तोड़ोगे? बोलो साथी! क्या...
Ali Sardar Jafri

कौन आज़ाद हुआ

कौन आज़ाद हुआ? किसके माथे से ग़ुलामी की सियाही छूटी?मेरे सीने में अभी दर्द है महकूमी का मदर-ए-हिन्द के चेहरे पे उदासी है वही ख़ंजर आज़ाद हैं...
Man walking in front of a wall

मांडणे और नारे

जब तक आदमी के हाथ और आँखें हैं आँखों में धरती, आकाश, फूल, पत्ती हैं दूध, दही, नगाड़े, बेटे, बेटी हैं गाड़ी, बैल, मोर, चिड़ियाँ, चाँद, तारे...
Naveen Sagar

अच्छी सरकार

यह बहुत अच्‍छी सरकार है इसके एक हाथ में सितार, दूसरे में हथियार है सितार बजाने और हथियार चलाने की तजुर्बेकार हैइसका निशाना अचूक है क़ानून की एड़ियों वाले...
Strike, Protest, Dissent

हड़ताल का गीत

आज हम हड़ताल पर हैं। हड्डियों से जो चिपककर रह गई, उस खाल पर हैं।यह ख़बर सबको सुना दो इश्तहारों में लगा दो हम लड़ाई पर खड़े...

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Man lying on footpath, Homeless

तीन चित्र : स्वप्न, इनकार और फ़ुटपाथ पर लेटी दुनिया

1 हम मृत्यु-शैय्या पर लेटे-लेटे स्वप्न में ख़ुद को दौड़ता हुआ देख रहे हैंऔर हमें लगता है हम जी रहे हैं हम अपनी लकड़ियों में आग के...
Fair, Horse Ride, Toy

मेला

1 हर बार उस बड़ी चरखी पर जाता हूँ जो पेट में छुपी हुई मुस्कान चेहरे तक लाती है कई लोग साल-भर में इतना नहीं हँसते जितना खिलखिला लेते हैं...
Man holding train handle

आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
Justyna Bargielska

यूस्टीना बारगिल्स्का की कविताएँ

1977 में जन्मीं, पोलिश कवयित्री व उपन्यासकार यूस्टीना बारगिल्स्का (Justyna Bargielska) के अब तक सात कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें दो...
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Chen Kun Lun

चेन कुन लुन की कविताएँ

चेन कुन लुन का जन्म दक्षिणी ताइवान के काओशोंग शहर में सन 1952 में हुआ। वह एक सुधी सम्पादक रहे हैं। चेन लिटरेरी ताइवान...
Bharat Ke Pradhanmantri - Rasheed Kidwai

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सुपरिचित पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई की किताब 'भारत के प्रधानमंत्री : देश, दशा, दिशा' भारत के पहले प्रधानमंत्री से लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री...
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एक छाया-चित्र है। प्रेमचन्द और प्रसाद दोनों खड़े हैं। प्रसाद गम्भीर सस्मित। प्रेमचन्द के होंठों पर अस्फुट हास्य। विभिन्न विचित्र प्रकृति के दो धुरन्धर...
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