Tag: विरोध
वह भला आदमी
वह भला-सा आदमी
हमारे बीच की एक इकाई बन
कल तक हमारे साथ था।
वह चौराहे के इस ओर
मुँह में पान की गिल्लोरियाँ दबाए
चहका करता था यहाँ-वहाँ
खादी...
बाढ़ की सम्भावनाएँ सामने हैं
बाढ़ की सम्भावनाएँ सामने हैं,
और नदियों के किनारे घर बने हैं।
चीड़-वन में आँधियों की बात मत कर,
इन दरख़्तों के बहुत नाज़ुक तने हैं।
इस तरह...
नया हुक्मनामा
'Naya Hukmnama', a nazm by Javed Akhtar
किसी का हुक्म है सारी हवाएँ
हमेशा चलने से पहले बताएँ
कि उन की सम्त क्या है
किधर जा रही हैं
हवाओं...
ज़िन्दा हिन्दुस्तान है जेएनयू
'Zinda Hindustan Hai JNU', a poem by Gaurav Bharti
जिस हिन्दुस्तान की शान में
अल्लामा इक़बाल ने कहा था-
'कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी'
उसी हिन्दुस्तान...
मुझे फ़ख़्र है अपने देशद्रोही होने पर
मैं जीने के लिए
सच का साथ चुनता हूँ
मैं कविताएँ लिखता हूँ
मैं साहित्य पढ़ता हूँ
मेरा कोई धर्म नहीं
सिवाय आदमी होने के
मैं किसी ईश्वर की पूजा...
नज़रिया
'Nazariya', a poem by Adarsh Bhushan
तुम्हें बेवजह देशद्रोही
ठहरा दिया जाएगा
जब अपना हक़ माँगोगे
घूसे बरसा दिए जाएँगे
तुम्हारे उन्हीं अधरों पर
जिनसे चंद मिनटों पहले
तुमने अपनी पहली...
अंकित कुमार भगत की कविताएँ
Poems: Ankit Kumar Bhagat
प्रतिरोध
काले गुलाब
और स्याह परछाइयों के बाद,
कालिख पुती दीवारें
इस दौर की विशेषताएँ हैं।
अँधेरा गहराता ही जाता है,
कि असहमतियों को आज़माने की
इजाज़त नहीं यहाँ।
विद्रोह...
आवाज़ें मरा नहीं करतीं
'Aawaazein Mara Nahi Karti', a poem by Suraj Taransh
तुम जला डालो
घास-फूस से बने हमारे घर को
एक तिनका बच ही जायेगा
जो बिंध जाएगा
तुम्हारी आँखों में...
सुलग...
एकलव्य का कटा अँगूठा
'Eklavya Ka Kata Angootha', a poem by Alok Azad
वो जो हर बार तुम्हारे
न्यायालय की दीवारों पर
आज़ादी लिखने आता है
वो जो सड़कों पर
मुट्ठी को भींच
इंक़लाब के...
अम्बिकेश कुमार की कविताएँ
Poems: Ambikesh Kumar
विकल्प
उसने खाना माँगा
उसे थमा दिया गया मानवविकास सूचकाँक
उसने छत माँगी हज़ारों चुप्पियों के बाद
उसे दिया गया एक पूरा लम्बा भाषण
उसने वस्त्र माँगा मेहनताना
उसे...
बच्चों की हँसी, प्रेमियों का चुम्बन और कवि का विद्रोह
'Bachchon Ki Hansi, Premiyon Ka Chumban Aur Kavi Ka Vidroh', a poem by Anurag Anant
बच्चों की हँसी से सबसे ज़्यादा डरते हैं तानाशाह
प्रेमियों के...
बाज़
योगेश मिश्रा की कविता 'बाज़' | 'Baaz', a poem by Yogesh Mishra
एक बाज़ ने कब्ज़ाया है एक गाँव
जिसे बसाया था चिड़ियों ने
जिसमें रहते थे...










