Tag: विरोध

Man on stairs

वह भला आदमी

वह भला-सा आदमी हमारे बीच की एक इकाई बन कल तक हमारे साथ था। वह चौराहे के इस ओर मुँह में पान की गिल्लोरियाँ दबाए चहका करता था यहाँ-वहाँ खादी...
Dushyant Kumar

बाढ़ की सम्भावनाएँ सामने हैं

बाढ़ की सम्भावनाएँ सामने हैं, और नदियों के किनारे घर बने हैं। चीड़-वन में आँधियों की बात मत कर, इन दरख़्तों के बहुत नाज़ुक तने हैं। इस तरह...
Javed Akhtar

नया हुक्मनामा

'Naya Hukmnama', a nazm by Javed Akhtar किसी का हुक्म है सारी हवाएँ हमेशा चलने से पहले बताएँ कि उन की सम्त क्या है किधर जा रही हैं हवाओं...
Gaurav Bharti

ज़िन्दा हिन्दुस्तान है जेएनयू

'Zinda Hindustan Hai JNU', a poem by Gaurav Bharti जिस हिन्दुस्तान की शान में अल्लामा इक़बाल ने कहा था- 'कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी' उसी हिन्दुस्तान...
Paritosh Kumar Piyush

मुझे फ़ख़्र है अपने देशद्रोही होने पर

मैं जीने के लिए सच का साथ चुनता हूँ मैं कविताएँ लिखता हूँ मैं साहित्य पढ़ता हूँ मेरा कोई धर्म नहीं सिवाय आदमी होने के मैं किसी ईश्वर की पूजा...
Protest, People

नज़रिया

'Nazariya', a poem by Adarsh Bhushan तुम्हें बेवजह देशद्रोही ठहरा दिया जाएगा जब अपना हक़ माँगोगे घूसे बरसा दिए जाएँगे तुम्हारे उन्हीं अधरों पर जिनसे चंद मिनटों पहले तुमने अपनी पहली...
Fist, Protest, Dissent

अंकित कुमार भगत की कविताएँ

Poems: Ankit Kumar Bhagat प्रतिरोध काले गुलाब और स्याह परछाइयों के बाद, कालिख पुती दीवारें इस दौर की विशेषताएँ हैं। अँधेरा गहराता ही जाता है, कि असहमतियों को आज़माने की इजाज़त नहीं यहाँ। विद्रोह...
Fist, Protest, Dissent

आवाज़ें मरा नहीं करतीं

'Aawaazein Mara Nahi Karti', a poem by Suraj Taransh तुम जला डालो घास-फूस से बने हमारे घर को एक तिनका बच ही जायेगा जो बिंध जाएगा तुम्हारी आँखों में... सुलग...
Arrow, Baan, Archery

एकलव्य का कटा अँगूठा

'Eklavya Ka Kata Angootha', a poem by Alok Azad वो जो हर बार तुम्हारे न्यायालय की दीवारों पर आज़ादी लिखने आता है वो जो सड़कों पर मुट्ठी को भींच इंक़लाब के...
Common Man

अम्बिकेश कुमार की कविताएँ

Poems: Ambikesh Kumar विकल्प उसने खाना माँगा उसे थमा दिया गया मानवविकास सूचकाँक उसने छत माँगी हज़ारों चुप्पियों के बाद उसे दिया गया एक पूरा लम्बा भाषण उसने वस्त्र माँगा मेहनताना उसे...
Anurag Anant

बच्चों की हँसी, प्रेमियों का चुम्बन और कवि का विद्रोह

'Bachchon Ki Hansi, Premiyon Ka Chumban Aur Kavi Ka Vidroh', a poem by Anurag Anant बच्चों की हँसी से सबसे ज़्यादा डरते हैं तानाशाह प्रेमियों के...
Yogesh Mishra

बाज़

योगेश मिश्रा की कविता 'बाज़' | 'Baaz', a poem by Yogesh Mishra एक बाज़ ने कब्ज़ाया है एक गाँव जिसे बसाया था चिड़ियों ने जिसमें रहते थे...
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