Tag: पिता

टेलिपैथी

लकी राजीव की कहानी 'टेलीपैथी' | 'Telepathy', a story by Lucky Rajeev"बेटा, ये पलाजो क्या होता है?" मैंने मिनी के बालों में तेल लगाते...

सम्बल

'Sambal', a poem by Mohit Payalज़िन्दगी प्रश्न पूछती है कभी कठोर, कभी अनुत्तरदायी लेकिन रास्ते भी सुझाती है सरल से पर अनखोजे हुएज़िन्दगी का स्वभाव बिल्कुल मेरे...

रोटी बनाते हुए पिता

'Roti Banate Hue Pita', a poem by Usha Dashoraमेरे छोटे हाथ में चीनी के दाने होते दूसरे हाथ में पिता की उँगली और पाँवों में सात...
Deepak Jaiswal

बाबूजी

बाबूजी की मूँछ बहुत बार प्रेमचन्द की तरह लगती है कई आलोचक बताते हैं प्रेमचन्द ने अपनी मूँछ लमही के रघु नाई से हुबहू होरी की तरह कटवायी थी।बाबूजी के...
Shabana Kaleem Awwal

शबाना कलीम अव्वल की नज़्में

Poems by Shabana Kaleem Awwal बाप उदास शाम को बाँहों में भरकर बुज़ुर्ग बाप के चेहरे को हाथों में भर लूँ चूम लू उनको बेसाख़्ता उन रोशनियों के एवज़...
Father, Hands, Child, Hold

अनन्त सम्भावनाओं का अन्तिम सच

'Anant Sambhaavnaaon Ka Antim Sach', Hindi poem by Harshita Panchariyaपिता, अनन्त के विस्तार के अन्तिम छोर में, शून्यता समेटे वह ठोस ग्रह है जो वास्तव में तरलता से निर्मित है।पिता,...
Baby, Mother, Parent, Father

पिता का उत्कृष्ट

जमाकर देखता हूँ जब जीवन सफर क्रम से..पितरों के प्रतापों से पनपते वंश की गहरी जड़ों से.. बन चुके वटवृक्ष के शिखर सम से...उम्र महकती है अभी भी बालपन...
Vishnu Khare

जो मार खा रोईं नहीं

तिलक मार्ग थाने के सामने जो बिजली का एक बड़ा बक्स है उसके पीछे नाली पर बनी झुग्गी का वाक़या है यहचालीस के क़रीब उम्र का बाप सूखी...

पिता

पिता मेरी धमनियों में दौड़ता रक्त और तुम्हारी रिक्तता महसूस करती मैं, चेहरे की रंगत का तुमसा होना सुकून भर देता है मुझमें मैं हूँ पर तुमसी दिखती तो हूँ खैर हर...
Father, Bike, Market, Man

पापा

"वैसे भी वह डॉक्टर साहब भी मेरे पापा की तरह ही हैं। उनका बेटा रय्यान मेरा सहपाठी है और वह भी अपने पापा से 'एटीएम' के जैसे ही बात करता है, सिर्फ़ सवाल और जवाब। बल्कि मुझे लगता है कि हिंदुस्तान में ज़्यादातर लड़कों और उनके पिताओं के बीच इसी तरह और इतना ही संवाद होता है।"
Kabin Phukan

एक पिता

घुप्प अँधेरे में जंगल की राह रोके खड़ा था फन फैलाए एक साँपद्रुत गति से लौट रहा था घर को उसी राह से बेचारा केंहूराम और... वो था एक अड़ियल साँप दोनों कुछ...
Gyan Ranjan

पिता

बूढ़े पिता अपना ज़िन्दगी जीने का ढंग नहीं छोड़ते। नई चीज़ें पसंद नहीं आती और पुराने से लगाव नहीं छूटता, चाहे कितनी भी असुविधा हो! नई और पुरानी पीढ़ी के इसी खिंचाव को रेखांकित करती है ज्ञानरंजन की कहानी 'पिता'। पढ़िए। :)

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Sunset

कितने प्रस्थान

सूरज अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया दिन-भर का चढ़ना उतरते हुए दृश्य को सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है यह संदेहयुक्त है अस्त होने की परिभाषा में कितना अस्त हो जाना दोबारा...
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कवच

मैं जानता हूँ तुम्हारा यह डर जो कि स्वाभाविक ही है, कि अगर तुम घर के बाहर पैर निकालोगे तो कहीं वैराट्य का सामना न हो जाए, तुम्हें...
Vishesh Chandra Naman

मैं

मैं एक तीर था जिसे सबने अपने तरकश में शामिल किया किसी ने चलाया नहींमैं एक फूल था टूटने को बेताब सबने मुझे देखा, मेरे रंगों की तारीफ़ की और मैं...
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Thaharti Sanson Ke Sirhane Se - Ananya Mukherjee

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'ठहरती साँसों के सिरहाने से' अनन्या मुखर्जी की डायरी है जो उन्होंने 18 नवम्बर, 2018 को स्तन कैंसर से लड़ाई हार जाने से पहले...
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