Tag: पिता

Agyeya

चीनी चाय पीते हुए

चाय पीते हुए मैं अपने पिता के बारे में सोच रहा हूँ।आपने कभी चाय पीते हुए पिता के बारे में सोचा है?अच्छी बात नहीं है पिताओं के बारे...
Dream

स्वप्न के घोंसले

स्वप्न में पिता घोंसले के बाहर खड़े हैं मैं उड़ नहीं सकती माँ उड़ चुकी हैकहाँ कुछ पता नहींमेरे आगे किताब-क़लम रख गया है कोई और कह गया...
Nirmal Gupt

स्मृति में पिता

मेरे पिता सेवानिवृत्त हुए तो दफ़्तर की मेज़ पर रखे विदाई के सामान वहीं छोड़ आए, अपनी अधिकारिक अहमन्यता मोटे अक्षरों में छपी मानस की प्रति और नक़्क़ाशीदार फ़ोल्डिंग छड़ी भीदे...
Girl, Woman

पिता के घर में मैं

पिता क्या मैं तुम्हें याद हूँ? मुझे तो तुम याद रहते हो क्योंकि ये हमेशा मुझे याद कराया गया। फ़ासीवाद मुझे कभी किताब से नहीं समझना पड़ा।पिता...
Om Nagar

ओम नागर की कविताएँ

प्रस्तुति: विजय राही पिता की वर्णमाला पिता के लिए काला अक्षर भैंस बराबर। पिता नहीं गए कभी स्कूल जो सीख पाते दुनिया की वर्णमाला।पिता ने कभी नहीं किया काली...
Father Daughter, Girl, Kid

मुहर-भर रहे पिता

उन लड़कियों ने जाना पिता को एक अडिग आदेश-सा, एक मुहर-भर रहे पिता बेटियों के दस्तावेज़ों पर।कहाँ जाना, क्या खाना, क्या पढ़ना, निर्धारित कर, पिता ने निभायीं ज़िम्मेदारियाँ अपनी, बहरे रहे...
Old age, Hand

बुरा सपना

'Bura Sapna', a poem by Amar Dalpuraमैं देख रहा हूँ बहुत पुरानी खाट पर पिता की नींद इस तरह चिपकी है जैसे नंगी पीठ पर नींद की करवटें...
Rahul Boyal

शिशुओं का रोना

'Shishuon Ka Rona', a poem by Rahul Boyalमेरी दृष्टि में सभी शिशुओं के रोने का स्वर तक़रीबन एक जैसा होता है और हँसने की ध्वनि भी लगभग...
Vivek Chaturvedi

पिता

'Pita', Hindi Kavita by Vivek Chaturvediपिता! तुम हिमालय थे पिता! कभी तो कितने विराट पिघलते हुए से कभी बुलाते अपनी दुर्गम चोटियों से भी और ऊपर कि आओ- चढ़...
Nirmal Gupt

सम्वाद का पुल

'Samvad Ka Pul', a poem by Nirmal Guptमैं लिखा करता था अपने पिता को ख़त जब मैं होता था उद्विग्न, व्यथित या फिर बहुत उदास, जब मुझे दिखायी देती थीं अपनी...
Nirmal Gupt

पिता और व्हीलचेयर

'Pita Aur Wheelchair', a poem by Nirmal Guptपिता व्हीलचेयर पर बैठे थे एकदम इत्मिनान के साथ, उनके अलावा सबको पता था वह हो सकते हैं वहाँ से किसी पल...
Father, Hands, Child, Hold

पितृ-स्मृति, पिता की आख़िरी साँस

Poems: Santwana Shrikant पितृ-स्मृति दीवार पर टँगी तस्वीर मेरे पिता की, और उस पर चढ़ी माला, खूँटी पर टँगी उनकी शर्ट, घड़ी जो आसपास ही पड़ी होगी, उनके न होने की कमी पूरी नहीं...

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Nurit Zarchi

नूइत ज़ारकी की कविता ‘विचित्रता’

नूइत ज़ारकी इज़राइली कवयित्री हैं जो विभिन्न साहित्य-सम्बन्धी पुरस्कारों से सम्मानित हैं। प्रस्तुत कविता उनकी हीब्रू कविता के तैल गोल्डफ़ाइन द्वारा किए गए अंग्रेज़ी...
Sunset

कितने प्रस्थान

सूरज अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया दिन-भर का चढ़ना उतरते हुए दृश्य को सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है यह संदेहयुक्त है अस्त होने की परिभाषा में कितना अस्त हो जाना दोबारा...
Naresh Mehta

कवच

मैं जानता हूँ तुम्हारा यह डर जो कि स्वाभाविक ही है, कि अगर तुम घर के बाहर पैर निकालोगे तो कहीं वैराट्य का सामना न हो जाए, तुम्हें...
Vishesh Chandra Naman

मैं

मैं एक तीर था जिसे सबने अपने तरकश में शामिल किया किसी ने चलाया नहींमैं एक फूल था टूटने को बेताब सबने मुझे देखा, मेरे रंगों की तारीफ़ की और मैं...
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कविताएँ: नवम्बर 2021

यात्री भ्रम कितना ख़ूबसूरत हो सकता है? इसका एक ही जवाब है मेरे पास कि तुम्हारे होने के भ्रम ने मुझे ज़िन्दा रखातुम्हारे होने के भ्रम में मैंने शहर...
God, Abstract Human

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नहीं है तुम्हारी देह में यह रुधिर जिसके वर्ण में अब ढल रही है दिवा और अँधेरा सालता हैरोज़ थोड़ी मर रही आबादियों में रोज़ थोड़ी बढ़ रही...
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कहानी: 'सातवाँ आदमी' लेखक: हारुकी मुराकामी जापानी से अनुवाद: क्रिस्टोफ़र एलिशन हिन्दी अनुवाद: श्रीविलास सिंह"वह मेरी उम्र के दसवें वर्ष के दौरान सितम्बर का एक अपराह्न था...
Aashika Shivangi Singh

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कविता सरहदों के पार, हक़ीक़त के बीच दरार और कुछ बेतरतीब विचार

वरिष्ठ ताइवानी कवि एवं आलोचक ली मिन-युंग की कविताओं के हिन्दी अनुवाद का संकलन 'हक़ीक़त के बीच दरार' जुलाई में पाठकों तक पहुँचा। साहित्यिक...
Thaharti Sanson Ke Sirhane Se - Ananya Mukherjee

दुःख, दर्द और उम्मीद का मौसम (अनन्य मुखर्जी की कैंसर डायरी)

'ठहरती साँसों के सिरहाने से' अनन्या मुखर्जी की डायरी है जो उन्होंने 18 नवम्बर, 2018 को स्तन कैंसर से लड़ाई हार जाने से पहले...
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