Tag: Metered Verses
विश्व भर की हलचलें
विश्व भर की हलचलें गहरे तिमिर में खो गयीं!
पड़ गया हरियालियों का रंग कुछ-कुछ साँवला,
भौंर की मधु बाँसुरी का स्वर कहीं लय हो गया,
बालपन...
औरत
उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है तुझे
क़ल्ब-ए-माहौल में लर्ज़ां शरर-ए-जंग हैं आज
हौसले वक़्त के और ज़ीस्त के यक-रंग हैं आज
आबगीनों में तपाँ...
मकान
आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है
आज की रात न फ़ुटपाथ पे नींद आएगी
सब उठो, मैं भी उठूँ, तुम भी उठो, तुम भी...
कचनार की टहनी
झुकी मन के गवाक्षों पर किसी कचनार की टहनी
हमारे द्वार तक आयी किसी के द्वार की टहनी
लदी जब लाल फूलों से, बुलाने लग गई...
चंद रोज़ और मेरी जान
चंद रोज़ और मेरी जान फ़क़त चंद ही रोज़
ज़ुल्म की छाँव में दम लेने पे मजबूर हैं हम
और कुछ देर सितम सह लें, तड़प...
जाहिल के बाने
मैं असभ्य हूँ क्योंकि खुले नंगे पाँवों चलता हूँ
मैं असभ्य हूँ क्योंकि धूल की गोदी में पलता हूँ
मैं असभ्य हूँ क्योंकि चीरकर धरती धान...
मेरे गीत तुम्हारे हैं
अब तक मेरे गीतों में उम्मीद भी थी, पसपाई भी
मौत के क़दमों की आहट भी, जीवन की अंगड़ाई भी
मुस्तक़बिल की किरनें भी थीं, हाल...
उनकी तस्वीर देखकर
आज क्या है जो मिला शोख़ निगाहों को क़रार?
क्या हुआ हुस्न की मासूम हयाओं का वक़ार
आज क्यूँ तुम मुझे देखे ही चले जाते हो?
दफ़अतन...
ऊट-पटाँग
कानों की इक नगरी देखी, जिसमें सारे काने देखे
एक तरफ़ से अहमक़ सारे, एक तरफ़ से सियाने थे
कानों की इस नगरी के सब रीत...
फ़र्ज़ करो हम अहल-ए-वफ़ा हों
फ़र्ज़ करो हम अहल-ए-वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों
फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूठी हों, अफ़्साने हों
फ़र्ज़ करो ये जी की बिपता, जी से...
ख़ूबसूरत मोड़
'Khoobsurat Mod' - Sahir Ludhianvi
चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों
न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की
न तुम मेरी तरफ़...
कोई फूल धूप की पत्तियों में
कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ
वो ग़ज़ल का लहजा नया-नया, न कहा हुआ, न सुना हुआ
जिसे ले गई है...










