Tag: Metered Verses
बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ
'Besan Ki Saundhi Roti', poetry by Nida Fazli
बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ
याद आती है चौका बासन चिमटा फुकनी जैसी माँ
बाँस...
पुरुष सौंदर्य
'Purush Saundarya', a poem by Shweta Rai
चंदन वन सा महक रहे तुम, अरुण आभ लेकर तन में।
सुरभित करते सांसों को तुम, कस्तूरी लेकर मन...
एक कबूतर चिठ्ठी लेकर पहली-पहली बार उड़ा
'Ek Kabootar Chitthi Lekar Pehli Pehli Baar Uda', a ghazal by Dushyant Kumar
एक कबूतर चिठ्ठी लेकर पहली-पहली बार उड़ा
मौसम एक गुलेल लिये था, पट...
गुँजन ला
'Gunjan La', a poem by Chandra Kunwar Bartwal
तेरा मन मेरा हो जाए, मेरा मन तेरा हो जाए,
मैं तेरे मन की बात सुनूँ, तू मेरे...
चाँद सितारे क़ैद हैं सारे
'Chand Sitare Qaid Hain Sare Waqt Ke Bandikhaane Mein', a ghazal by Meeraji
चाँद सितारे क़ैद हैं सारे वक़्त के बंदी-ख़ाने में
लेकिन मैं आज़ाद हूँ...
नज़्र-ए-दिल
अपने दिल को दोनों आलम से उठा सकता हूँ मैं
क्या समझती हो कि तुम को भी भुला सकता हूँ मैं
कौन तुमसे छीन सकता है...
प्यार से प्रश्न
प्यार तुम, अनुभूति तुम, आयाम बन कर क्या करोगे?
तुम हृदय के भाव हो, आवाज़ बन कर क्या करोगे?
ज़िन्दगी की तुम महक, तुम जीवन की...
आदमीनामा
मेरी प्यारी औरत उषा सिंगर लेकर क्या समझीं
सीने वाले सूट कमीज दोशाले हम ही होते हैं
घर की हांडी भून के किस ख़ुशफ़हमी में तुम...
तुम कहते संघर्ष कुछ नहीं
तुम कहते संघर्ष कुछ नहीं, वह मेरा जीवन अवलम्बन!
जहाँ श्वास की हर सिहरन में, आहों के अम्बार सुलगते
जहाँ प्राण की प्रति धड़कन में, उमस...
मन मूरख मिट्टी का माधो, हर साँचे में ढल जाता है
मन मूरख मिट्टी का माधो, हर साँचे में ढल जाता है
इसको तुम क्या धोखा दोगे, बात की बात बहल जाता है
जी की जी में रह जाती...
मैं प्रलय वह्नि का वाहक हूँ
मैं प्रलय वह्नि का वाहक हूँ,
मिट्टी के पुतले मानव का संसार मिटाने आया हूँ!
शोषित दल के उच्छवासों से, वह काँप रहा अवनी अम्बर
उन अबलाओं...
नन्हा क़ासिद
तिरा नन्हा सा क़ासिद जो तिरे ख़त ले कर आता था
न था मालूम उसे किस तरह के पैग़ाम लाता था
समझ सकता न था वो...









