Tag: Prayers

Rituraj

अँधेरे में प्रार्थना

ले चलो मुझे इस लोक से दूर कहीं जहाँ निर्धन धनवानों को चुनते नहीं जहाँ मूर्ख और पंगु नहीं बनते बुद्धिमान जहाँ निर्बल स्त्रियों पर वीरता नहीं...
Gopal Singh Nepali

प्रार्थना बनी रहीं

रोटियाँ ग़रीब की, प्रार्थना बनी रहीं!एक ही तो प्रश्न है रोटियों की पीर का पर उसे भी आसरा आँसुओं के नीर का राज है ग़रीब का,...
Kumar Mangalam

कविताएँ — जुलाई 2020

शहर 1किसी पुराने शहर की गलियों के पत्थर उखड़ने लगे हैं कुछ बदरंग इमारतें ढह गई हैंबेवश एक बुज़ुर्ग आसमान देखता है और अपनी मौत का इंतज़ार करता है उस बुज़ुर्ग की...
Prayers, Joined Hands

प्रार्थनाओं से बचना

दुःखों में बचे रहना चाहते हो तो प्रार्थनाओं से बचनाप्रार्थना रत हथेलियों के बीच से बह जाता है एक हिस्सा जुझारूपन एक हिस्सा जिजीविषाप्रार्थनाएँ प्रमेय हैं जो सिद्ध...
Ram Dayal Munda

राम दयाल मुण्डा की कविताएँ

सूखी नदी/भरी नदी सूखी नदी एक व्यथा-कहानी जब था पानी तब था पानी!भरी नदी एक सीधी कहानी ऊपर पानी, नीचे पानी। विरोध उसे बाँधकर ले जा रहे थे राजा के सेनानी और नदी छाती पीटकर...
Harshita Panchariya

भ्रम

स्मृतियों में सहेजने के तौर पर दिए गए सभी चुम्बन पीड़ा में ऐसे भ्रम बनाए रखते हैं, मानो आँख खुलते ही ईश्वर सामने नज़र आ जाएगा।यूँ बंद आँखों के...
Hand, Gone, Left, Calling, Away

कठघरे में भूमिका, वो बात

Poems: Yogesh Dhyani कठघरे में भूमिका सन्देह से परे था तुम्हारा प्रेम फिर क्यों हाथ आया विछोहअनुपस्थित था शायद कोई तुम्हारी प्रार्थना से असम्भव है मान पाना कि तुमने नही माँगा मुझे अपनी प्रार्थना...
Prayers, Joined Hands

प्रार्थना

'Prarthana', poems by Rupam Mishraपराई पीड़ा में बहने वाले आँसू प्रार्थना के गीत होते हैं! क्षणिक ही सही कम से कम उस पल के लिए हम पवित्र...

प्रार्थनाएँ

स्वयं से संवाद में आकार लेती हैं, प्रार्थनाएँ मन की थाह लेती हैं। उगती है दिल की कच्ची ज़मीं पर, प्रार्थनाएँ अंधेरों में पनाह लेती हैं। उसके रचे से बचे के लिए होती...
Hands, Prayer, Prarthana

आख़िरी दुआ

आख़िरी दुआ माँगने को हूँ आसमान पर, रात के सिवा, कुछ नहीं रहा कौन मुट्ठियाँ, रेत से भरे पानियों का रुख, शहर की तरफ़, अब नहीं रहा।कितने...

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चेन च्येन वू की कविताएँ

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Ekaterina Grigorova

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अनुवाद: पंखुरी सिन्हा सामान्यता मुझे बाल्टिक समुद्र का भूरा पानी याद है! 16 डिग्री तापमान की अनंत ऊर्जा का भीतरी अनुशासन!बदसूरत-सी एक चीख़ निकालती है पेट्रा और उड़ जाता है आकाश में बत्तखों...
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