बराबर से बच कर गुज़र जाने वाले
बराबर से बच कर गुज़र जाने वाले
ये नाले नहीं बे-असर जाने वाले
नहीं जानते कुछ कि जाना कहाँ है
चले जा रहे हैं मगर जाने वाले
मिरे...
तुम्हें हम चाहते तो हैं मगर क्या
तुम्हें हम चाहते तो हैं मगर क्या
मोहब्बत क्या, मोहब्बत का असर क्या
वफ़ा का नाम तो पीछे लिया है
कहा था तुम ने इस से पेशतर...
हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
क्यूँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी
बअ'द मरने के भी छोड़ी न रिफ़ाक़त मेरी
मेरी तुर्बत से...
बेसहारों का इंतिज़ाम करो
बेसहारों का इंतिज़ाम करो
यानी इक और क़त्ल-ए-आम करो
ख़ैर-ख़्वाहों का मशवरा ये है
ठोकरें खाओ और सलाम करो
दब के रहना हमें नहीं मंज़ूर
ज़ालिमो जाओ अपना काम...
रंज की जब गुफ़्तुगू होने लगी
रंज की जब गुफ़्तुगू होने लगी
आप से तुम, तुम से तू होने लगी
चाहिए पैग़ाम-बर दोनों तरफ़
लुत्फ़ क्या जब दू-ब-दू होने लगी
मेरी रुस्वाई की नौबत...
क्या कहें दुनिया में हम इंसान या हैवान थे
क्या कहें दुनिया में हम इंसान या हैवान थे
ख़ाक थे क्या थे ग़रज़ इक आन के मेहमान थे
कर रहे थे अपना क़ब्ज़ा ग़ैर की इम्लाक...
जल्दी पड़ी सबको यहां अपने जवाब की
जल्दी पड़ी सबको यहां अपने जवाब की,
पर पूछता कोई नहीं हालत किताब की।
जो कांप उठते थे ये बीयर बार देखकर,
वो कर रहे हैं इल्तिजा मुझसे...
प्यार पंछी, सोच पिंजरा
प्यार पंछी, सोच पिंजरा, दोनों अपने साथ हैं,
एक सच्चा, एक झूठा, दोनों अपने साथ हैं।
आसमाँ के साथ हमको ये जमीं भी चाहिए,
भोर बिटिया, साँझ...
हुस्न फिर फ़ित्नागर है क्या कहिए
हुस्न फिर फ़ित्नागर है क्या कहिए
दिल की जानिब नज़र है क्या कहिए
फिर वही रहगुज़र है क्या कहिए
ज़िंदगी राह पर है क्या कहिए
हुस्न ख़ुद पर्दा-वर...
हो के आशिक़ जान मरने से चुराए किस लिए
हो के आशिक़ जान मरने से चुराए किस लिए
मर्द-ए-मैदाँ जो न हो मैदाँ में आए किस लिए
जो दिल-ओ-ईमाँ न दीं नज़्र उन बुतों को...
वो आलम है कि मुँह फेरे हुए आलम निकलता है
वो आलम है कि मुँह फेरे हुए आलम निकलता है
शब-ए-फ़ुर्क़त के ग़म झेले हुओं का दम निकलता है
इलाही ख़ैर हो उलझन पे उलझन बढ़ती...
जुनूँ पे अक़्ल का साया है, देखिए क्या हो
जुनूँ पे अक़्ल का साया है, देखिए क्या हो
हवस ने इश्क़ को घेरा है, देखिए क्या हो
गई बहार मगर आज भी बहार की याद
दिल-ए-हज़ीं...
















