पहले तो मुझे कहा निकालो
पहले तो मुझे कहा निकालो
फिर बोले ग़रीब है बुला लो
बे-दिल रखने से फ़ाएदा क्या
तुम जान से मुझ को मार डालो
उस ने भी तो देखी...
छतों को सर चढ़ा कर के रखा है
छतों को सर चढ़ा कर के रखा है
दीवारों ने बिगाड़ा मामला है
करो मालूम कि क्या माजरा है
क्यों सबके सर पे ये टीका लगा है
तुम्हें मुझपे...
वाँ अगर जाएँ तो ले कर जाएँ क्या
वाँ अगर जाएँ तो ले कर जाएँ क्या
मुँह उसे हम जा के ये दिखलाएँ क्या
दिल में है बाक़ी वही हिर्स-ए-गुनाह
फिर किए से अपने हम...
ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई
ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई
हाँ लुत्फ़ जब है पा के भी ढूँढा करे कोई
तुम ने तो हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना सुना दिया
किस दिल...
क्या जाने किस की प्यास बुझाने किधर गईं
क्या जाने किस की प्यास बुझाने किधर गईं
इस सर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गईं
दीवाना पूछता है ये लहरों से बार-बार
कुछ बस्तियाँ यहाँ...
अपनी अलग चिन्हारी रख
अब नहीं उनसे यारी रख
अपनी लड़ाई जारी रख
भूख ग़रीबी के मसले पे
अब इक पत्थर भारी रख
कवि मंचों पर बने विदूषक
उनके नाम मदारी रख
भीड़-भाड़ में खो...
चाहे तन मन सब जल जाए
चाहे तन मन सब जल जाए
सोज़-ए-दरूँ पर आँच न आए
शीशा टूटे ग़ुल मच जाए
दिल टूटे आवाज़ न आए
बहर-ए-मोहब्बत तौबा! तौबा!
तैरा जाए न डूबा जाए
ऐ...
मोहब्बत का असर जाता कहाँ है
मोहब्बत का असर जाता कहाँ है
हमारा दर्द-ए-सर जाता कहाँ है
दिल-ए-बेताब सीने से निकल कर
चला है तू किधर, जाता कहाँ है
अदम कहते हैं उस कूचे...
जाँ से गुज़रे भी तो दरिया से गुज़ारेंगे तुम्हें
जाँ से गुज़रे भी तो दरिया से गुज़ारेंगे तुम्हें
साथ मत छोड़ना हम पार उतारेंगे तुम्हें
तुम सुनो या न सुनो, हाथ बढ़ाओ न बढ़ाओ
डूबते डूबते...
न पूछ क्यूँ मिरी आँखों में आ गए आँसू
न पूछ क्यूँ मिरी आँखों में आ गए आँसू
जो तेरे दिल में है इस बात पर नहीं आए
वफ़ा-ए-अहद है ये पा-शिकस्तगी तो नहीं
ठहर गया...
दिल को लेकर हमसे अब जाँ भी तलब करते हैं आप
'Dil Ko Lekar Humse', by Nazeer Akbarabadi
दिल को लेकर हमसे अब जाँ भी तलब करते हैं आप
लीजिए हाज़िर है पर ये तो ग़ज़ब करते...
जाना जाना जल्दी क्या है इन बातों को जाने दो
जाना जाना जल्दी क्या है, इन बातों को जाने दो
ठहरो ठहरो दिल तो ठहरे, मुझ को होश में आने दो
पाँव निकालो ख़ल्वत से, आए...

















