तराना-ए-बिस्मिल
'Tarana-E-Bismil' by Ram Prasad Bismil
बला से हमको लटकाए अगर सरकार फाँसी से,
लटकते आए अक्सर पैकरे-ईसार फाँसी से।
लबे-दम भी न खोली ज़ालिमों ने हथकड़ी मेरी,
तमन्ना थी कि...
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली
रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आँखें हँस दीं दिल...
क्या कहें उनसे बुतों में हमने क्या देखा नहीं
क्या कहें उनसे बुतों में हमने क्या देखा नहीं
जो यह कहते हैं सुना है, पर ख़ुदा देखा नहीं
ख़ौफ़ है रोज़े-क़यामत का तुझे इस वास्ते
तूने...








