‘Things Every Woman Should Have And Should Know’, a poem By Pamela Redmond Satran
अनुवाद: पुनीत कुसुम

एक औरत के पास
होना चाहिए पर्याप्त धन, अपने घर से बाहर निकल जाने
और किराए पर अपनी एक जगह ले लेने के लिए
भले ही वह यह कभी न करना चाहे या इसकी ज़रूरत उसे कभी न पड़े

एक औरत के पास
होना चाहिए पहनने के लिए कुछ ख़ूबसूरत, क्या पता उसका बॉस या उसका
सपनों का शहज़ादा मिलना चाहे उससे एक घण्टे के अंदर

एक औरत के पास
होनी चाहिए वह युवावस्था
जो वह ख़ुशी से और संतुष्ट होकर पीछे छोड़ सकती हो

एक औरत के पास
ऐसा मज़ेदार अतीत होना चाहिए जिसके बारे में वह ख़ूब आनंद लेकर सुना पाए अपने बुढ़ापे में

एक औरत के पास
होना चाहिए पेचकस का एक सेट, एक
बिना तार की ड्रिल और काली लेस वाली एक ब्रा

एक औरत के पास
एक ऐसा दोस्त होना चाहिए जो उसे हमेशा हँसाता हो
और एक ऐसा दोस्त, जिसके सामने रोने में वह सहज हो

एक औरत के पास
ऐसा फ़र्नीचर होना चाहिए
जैसा उसके परिवार में पहले किसी ने न खरीदा हो

एक औरत के पास
होनी चाहिए आठ एक-सी प्लेटें, लम्बे शराब के गिलास,
और किसी व्यंजन की एक रेसिपी
जिससे वो अपने मेहमानों की बढ़िया ख़ातिरदारी कर सके

एक औरत के पास
उसके भाग्य पर उसका नियंत्रण होने का एहसास होना चाहिए

हर औरत को पता होना चाहिए
कैसे पड़ा जाता है प्यार में, ख़ुद को खोए बिना

हर औरत को जानना चाहिए
कैसे छोड़नी है एक नौकरी, करना है विच्छेद
एक प्रेमी से,
और कैसे करना है विरोध किसी दोस्त का
बिना दोस्ती ख़राब किए

हर औरत को पता होना चाहिए
कब करने हैं और अधिक प्रयत्न और
कब चले जाना है हटकर दूर

हर औरत को पता होना चाहिए
कि वह नहीं बदल सकती अपनी पिण्डलियों की लम्बाई,
अपने नितम्बों का आकार
या स्वभाव अपने माता-पिता का

हर औरत को समझना चाहिए
कि उसका बचपन शायद परिपूर्ण नहीं था
लेकिन अब वह बीत चुका है

हर औरत को
जानना ही चाहिए
कि वह प्यार के लिए क्या कर सकती है और क्या नहीं

हर औरत जानती हो
कैसे रहा जाता है अकेला, चाहे यह उसे न भी पसंद हो

हर औरत को पता होना चाहिए
वह किसपर भरोसा कर सकती है, किसपर नहीं
और क्यों उसे यह बात व्यक्तिगत स्तर पर नहीं लेनी चाहिए

हर औरत को पता होना चाहिए
कि जब उसकी आत्मा चाहती हो कुछ आराम, तो उसे कहाँ जाना है
अपने सबसे अच्छे दोस्त की रसोईघर की खाने की मेज़ पर
या जंगल की किसी सुन्दर सराय में

हर औरत को पता होना चाहिए
वह क्या कर सकती है और क्या नहीं कर सकती, एक दिन में…
एक महीने में…
एक साल में…

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Book by Pamela Redmond Satran: