ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के उद्धरण | APJ Abdul Kalam Quotes in Hindi

 

“आप किस रूप में याद रखे जाना चाहेंगे? आपको अपने जीवन को कैसा स्वरूप देना है, उसे एक काग़ज़ पर लिख डालिए। वह मानव इतिहास का एक महत्त्वपूर्ण पृष्ठ हो सकता है।”


“सृजनशील व्यक्ति औरों की तरह ही स्थिति को देखता है, लेकिन उसके निष्कर्ष बने-बनाए ढाँचे से भिन्न और मौलिक होते हैं।”


“सितारों को न छू पाना लज्जा की बात नहीं, लज्जा की बात है मन में सितारों को छूने का हौसला ही न होना।”


“अनदेखे, अनजाने रास्तों पर चलने के लिए सदा तैयार रहना चाहिए।”


“बच्चों के मुँह पर मुस्कान सदैव बनी रहे, हमें ऐसी शिक्षा-प्रणाली लानी होगी।”


“सोचना विकास है, न सोचना विनाश।”


“जो कभी असम्भव माना जाता था, वह आज सम्भव हो रहा है और जो आज तक सम्भव नहीं हो पाया, वह कल अवश्य होगा।”


“शिक्षा का चरम लक्ष्य यही है कि विद्यार्थी यह सोचने लगे कि मैं समाज और देश के लिए क्या कर सकता हूँ।”


“जब एक बार बच्चों को कोई बात सिखा दी जाए तो फिर आपको भी वे उससे पलटने नहीं देंगे।”


“एक दीपक दूसरे दीपक को जलाता है तो उसका अपना कुछ भी नहीं जाता।”


“संगीत का आनंद लेने में भाषा आड़े नहीं आती।”


“तब तक सवाल करते रहो, जब तक संतोषजनक जवाब न मिल जाए।”


“लेखक समाज की आत्मा के प्रहरी हैं।”


“सत्ता सम्मान करती है, सत्ता का।”


“अपने अधिकारों की रक्षा इस तरह करें कि सभी के अधिकार सुरक्षित रहें।”


“शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान ही नहीं देता, वह उनके जीवन में, मन में, सपने भी भर देता है।”


“अगर आप सूर्य की भाँति चमकना चाहते हो तो पहले सूर्य की भाँति जलिए।”


“स्वप्न वे नहीं हैं जो आप नींद में देखते हैं, स्वप्न वे हैं जो आपको सोने ही नहीं देते।”


“जिन चीज़ों को मैं बदल नहीं सका, उन्हें मैं स्वीकार करने के लिए तैयार था।”


“प्रतीक्षा करने वाले को उतना ही मिलता है, जितना प्रयत्न करनेवाले छोड़ देते हैं।”


“मेरे लिए, नकारात्मक अनुभव जैसी कोई चीज़ नहीं हैं।”


“निपुणता एक सतत प्रक्रिया है, कोई दुर्घटना नहीं।”


“देश का सबसे अच्छा दिमाग़ क्लासरूम के आख़िरी बेंचों पर मिल सकता है।”


“छात्रों को प्रश्न ज़रूर पूछना चाहिए, यह छात्र का सर्वोत्तम गुण है।”


“कृत्रिम सुख की बजाय ठोस उपलब्धियों के पीछे समर्पित रहिए।”


“किसी भी धर्म में किसी धर्म को बनाए रखने और बढ़ाने के लिए दूसरों को मारना नहीं बताया गया।”

रवीन्द्रनाथ टैगोर के उद्धरण

Book by A P J Abdul Kalam: