अब और नहीं
आप नहीं कर सकते, नहीं कर सकते आप
अपने जूते में मुझे पैरों की तरह रखकर
मुझ बेचारी अभागिन को
तीस सालों से
साँस लेने और छींकने में भी
भयातुर होने पर विवश…
नहीं कर सकते आप

बाप जी! पितृहन्ता होने के
विद्यमान थे सुअवसर मुझे,
किन्तु इस कुकृत्य के पूर्व ही
आप काल कवलित हो गए
आप संगमरमर के भगवान थे
झोला-भर वज़नी
कराल मूर्ति, सील पशु समक्ष
सैनफ़्रांसिस्को नगर सम जिसके धूसर पाद-पंजे
सनकी नीले अटलांटिक पर
हरे सेम सरीखा
फैला जिसका अमरीका-सा मस्तक
नौसेट द्वीप के सुंदर कूल जिनका अलंकार
मैं वन्दना किया करती थी
आपकी बेहतरी का, बाप जी

जर्मन बानी में,
युद्ध, ये युद्ध, इसी युद्ध के रोलरों ने
किया था तबाह एक पोलीश क़स्बे को
बड़ा आम-सा नाम है उस क़स्बे का
मेरा पोलिश संगी कहता है
ऐसे दर्ज़नों क़स्बे मौजूद हैं पूरे पोलैंड में
पर मैं आपको कभी नहीं बता सकूँगी
आपने अपने पाँव कहाँ रखे
और जड़ कहाँ रखी

मैं आपसे बात कभी नहीं बता सकूँगी
मेरी जिह्वा जबड़े में अटकी है
जैसे कँटीले तारों से बिंध गयी ऐसी
इच इच इच
मैं बोल भी नहीं सकती आसानी से
सभी जर्मन जनों के प्रतीक हैं आप
तथा गर्हित है आपकी भाषा

छुक-छुक करती रेलगाड़ी
मुझे यहूदी डचाऊ, औशविट्ज़, बेलसन की ओर
यहूदी की तरह बैठाकर ले जा रही है
मैं यहूदी की तरह बात करने लगी हूँ
लगता है मैं पूर्णतः यहूदी हो जाऊँगी

इतने शुद्ध और सत्य तो
टायरॉल के बर्फ़ और
विएना के बीयर भी नहीं हैं
तो फिर मुझमें भी मिलावट है ना
मेरे बंजारे पूर्वजों, मेरे विचित्र भाग्य
और अपने टैरो कार्ड के साथ सम्भवतः
मैं भी अल्प रूप से हूँ यहूदी।

आप और आपके
एयरफ़ोर्स-वेयरफ़ोर्स से हमेशा डरती रही हूँ मैं
आपकी घनी, सजीली मूँछों से
आपके आर्य-प्रजाति नीली चमकीली आँखों से
जर्मन टैंकर चालक, आप…
आप…
भगवान नहीं बल्कि एक गहरा काला स्वास्तिक
जिसे गगन की कोई चीख़ भेद नहीं सकती
हर स्त्री किसी फ़ासीवादी को,
नृशंस हृदय को पसंद करती है और
उनके जूते अपने मुँह पर मार लेती है—
नृशंस… जैसे कि आप।

एक तस्वीर है मेरे पास आपकी
बाप जी!
आप किसी श्यामपट्ट के सामने खड़े हैं
आपकी ठोढ़ी में एक दरार है
जिसे पैरों में होना चाहिए था
हालाँकि यह भी किसी दानवी लक्षण से कम नहीं
नहीं, कदापि नहीं।
या किसी काले दरिंदे से कम नहीं
जिसने मेरे सुर्ख दिल के दो टुकड़े कर दिए।

दसवाँ वसंत था मेरा
लोगों ने आपको जब दफ़नाया था
बीसवें में मर जाना चाहती थी मैं
ताकि अपनी अस्थियों को आपमें
पुनः घुला आपको पा सकूँ
किन्तु खींचकर मुझे
लोग वज़नी झोले से दूर ले गए,
और दुनिया में सिल दिया।

अब जान गई मैं क्या करना था मुझे
मैंने आपका एक समरूप बना लिया
स्याह रंग का मानव—बिल्कुल मेरे संघर्ष जैसा
तलवार और ढाल के जैसा एक प्यार
जो मुझे स्वीकार है, स्वीकार है।
मैं बंध गयी बाप जी!

हमारे टेलीफ़ोन की सभी लाइनें बन्द हैं
क़ब्र के कीड़े संचार-साधन नहीं होते ना

मैंने एक नहीं, दो-दो हत्याएँ की हैं
क्या आप मानेंगे वह पिशाच
जो ख़ुद को आपकी जगह रखता था
उसने एक नहीं, सात सालों तक मेरा ख़ून चूसा है
आप एक बार फिर झूठ कह लें, बाप जी!
आपके काले मोटे हृदय में एक और दाँव है

आप गाँववालो की पसंद कभी नहीं थे
वो आपके शव को कुचलने और उस पर नाचने वाले लोग थे
उन्हें आपके समरूप का सच पता था

बाप जी! बाप जी!
मैं नीच की जाया हूँ।

लैंग्स्टन ह्यूज़ की कविता 'हारलम'

Book by Sylvia Plath: