फ़्रांत्स काफ़्का के उद्धरण | Franz Kafka Quotes in Hindi

अनुवाद: पुनीत कुसुम

“इक पिंजरा, इक पंछी की खोज में निकला।”

 

“एकान्त स्वयं को जानने का एक ज़रिया है।”

 

“तुम एक ही समय में मेरे हृदय की शान्ति और भ्रान्ति दोनों हो।”

 

“रास्ते चलने से बनते हैं।”

 

“कुछ किताबें स्वयं अपने ही घर के अपरिचित कमरों की चाबी जैसी लगती हैं।”

 

“सभी भाषाएँ और कुछ नहीं बस ख़राब अनुवाद हैं।”

 

“कोई भी जो सुन्दरता को पहचानने की क्षमता बचाए रखेगा, कभी बूढ़ा नहीं होगा।”

 

“कृपया, मुझे एक सपना मानो।”

 

“लिखना प्रार्थना का एक रूप है।”

 

“मैं कभी आसानी से परिभाषित नहीं होना चाहता।”

 

“तुम स्वतन्त्र होना चुन सकते हो, लेकिन यह तुम्हारे द्वारा लिया गया अन्तिम निर्णय होगा।”

 

“कुछ भी उतना भ्रामक नहीं है, जितना कि एक फ़ोटोग्राफ़।”

 

“मुझे मार दो, अन्यथा तुम एक हत्यारे हो।”

 

“दुनिया के ख़िलाफ़ आदमी के संघर्ष में, दाँव दुनिया पर लगाओ।”

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फ़्रांत्स काफ़्का
फ़्रेंज़ काफ्का (३ जुलाई १८८३ - ३ जून १९२४) बीसवीं सदी के एक सांस्कृतिक रूप से प्रभावशाली, लघु कहानियां और उपन्यास के जर्मन लेखक थे। उनकी रचनाऍं आधुनिक समाज के व्यग्र अलगाव को चित्रित करतीं हैं। समकालीन आलोचकों और शिक्षाविदों, व्लादिमिर नबोकोव सहित, का मानना है कि काफ्का 20 वीं सदी के सर्वश्रेष्ठ लेखकों में से एक है। "Kafkaesque" अंग्रेजी भाषा का हिस्सा बन गया है जिसका उपयोग 'बहकानेवाला', 'खतरनाक जटिलता' आदि के संदर्भ में किया जाता है।

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