जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्या,
घुँघटा में आग लगा देती,
मैं लाज के बंधन तोड़ सखी,
पिया प्यार को अपने मना लेती।

इन चुरियों की लाज पिया रखना,
ये तो पहन लई अब उतरत ना,
मोरा भाग सुहाग तुमई से है,
मैं तो तुम ही पर जुबना लुटा बैठी।

मोरे हार सिंगार की रात गई,
पियू संग उमंग की बात गई,
पियू संग उमंग मेरी आस नई।

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अमीर ख़ुसरो
अबुल हसन यमीनुद्दीन अमीर ख़ुसरो (1253-1325) चौदहवीं सदी के लगभग दिल्ली के निकट रहने वाले एक प्रमुख कवि शायर, गायक और संगीतकार थे। उनका परिवार कई पीढ़ियों से राजदरबार से सम्बंधित थाI स्वयं अमीर खुसरो ने आठ सुल्तानों का शासन देखा थाI अमीर खुसरो प्रथम मुस्लिम कवि थे जिन्होंने हिंदी शब्दों का खुलकर प्रयोग किया हैI वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने हिंदी, हिन्दवी और फारसी में एक साथ लिखाI

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