‘Maine Jo Geet Tere Pyar Ki Khatir’
a nazm by Sahir Ludhianvi

मैंने जो गीत तेरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे
आज उन गीतों को बाज़ार में ले आया हूँ

आज दुकान पे नीलाम उठेगा उनका
तूने जिन गीतों पे रक्खी थी मुहब्बत की असास
आज चाँदी की तराज़ू में तुलेगी हर चीज़
मेरे अफ़कार, मेरी शायरी, मेरा एहसास

जो तेरी ज़ात से मनसूब थे उन गीतों को
मुफ़्लिसी जिन्स बनाने पे उतर आयीहै
भूक तेरे रुख़-ए-रन्गीं के फ़सानों के एवज़
चंद अशिया-ए-ज़रूरत की तमन्नाई है

देख इस अर्सागह-ए-मेहनत-ओ-सर्माया में
मेरे नग़्में भी मेरे पास नहीं रह सकते
तेरे ज़लवे किसी ज़रदार की मीरास सही
तेरे ख़ाके भी मेरे पास नहीं रह सकते

आज उन गीतों को बाज़ार में ले आया हूँ
मैंने जो गीत तेरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे..

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Book by Sahir Ludhianvi:

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साहिर लुधियानवी
साहिर लुधियानवी (8 मार्च 1921 - 25 अक्टूबर 1980) एक प्रसिद्ध शायर तथा गीतकार थे। इनका जन्म लुधियाना में हुआ था और लाहौर (चार उर्दू पत्रिकाओं का सम्पादन, सन् 1948 तक) तथा बंबई (1949 के बाद) इनकी कर्मभूमि रही।

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