Tag: Death

Bhagwat Rawat

इतनी बड़ी मृत्यु

आजकल हर कोई, कहीं न कहीं जाने लगा है हर एक को पकड़ना है चुपके-से कोई ट्रेन किसी को न हो कानों-कान ख़बर इस तरह पहुँचना है...
Vishnu Khare

अन्तिम

क्या याद आता होगा मृत्यु के प्रारम्भ में मर्मान्तक वेदना की लम्बी मौत या कृतज्ञ बेहोशी में या उससे कुछ पहले— एक बहुत नन्ही लड़की अँगुलियाँ पकड़ती हुई या पास...
Rituraj

एक बार में सब कुछ

कुछ भी छोड़कर मत जाओ इस संसार में अपना नाम तक भी वे अपने शोधार्थियों के साथ कुछ ऐसा अनुचित करेंगे कि तुम्हारे नाम की संलिप्तता उनमें नज़र...
Man, Peace

मृत्यु को नींद कहूँगा

अंतिम कविता मृत्यु पर नहीं लिखूँगा लिखूँगा जीवन पर'अंधेरा है' को कहूँगा 'प्रकाश की अनुपस्थिति-भर' धोखे के क्षणों में याद करूँगा बारिश, हवा, सूरज मेरे अंदर जन्मती घृणा को बारिश...
Bhisham Sahni

मरने से पहले

मरने से एक दिन पहले तक उसे अपनी मौत का कोई पूर्वाभास नहीं था। हाँ, थोड़ी खीझ और थकान थी, पर फिर भी वह...
Sushant Supriye

सड़क की छाती पर कोलतार

सड़क की छाती पर कोलतार बिछा हुआ है। उस पर मज़दूरों के जत्थे की पदचाप है। इस दृश्य के उस पार उनके दुख-दर्द हैं।...
Ashok Vajpeyi

‘कहीं नहीं वहीं’ से कविताएँ

'कहीं नहीं वहीं' से कविताएँ सिर्फ़ नहीं नहीं, सिर्फ़ आत्मा ही नहीं झुलसेगी प्रेम में देह भी झुलस जाएगी उसकी आँच सेनहीं, सिर्फ़ देह ही नहीं जलेगी अन्त्येष्टि में आत्मा भी...
Kailash Vajpeyi

जो है

बचपन में वह नास्तिक नहीं था, पिता को देखकर याद आ जाया करते थे देवता सुन रखी थीं जिनकी कहानियाँ माँ से, पत्थर हुई औरत का आख्यान पढ़कर उसने यह...
Ashok Vajpeyi

अन्त के बाद

'कहीं नहीं वहीं' से 1 अन्त के बाद हम चुपचाप नहीं बैठेंगे।फिर झगड़ेंगे। फिर खोजेंगे। फिर सीमा लांघेंगे।क्षिति जल पावक गगन समीर से फिर कहेंगे— चलो हमको रूप दो, आकार दो। वही जो पहले...
Sachidananda Routray

मसान का फूल

पोड़ा बसंत शासन (ब्राह्मणों का गाँव) का जगू तिवारी कीर्तन करता है, मृदंग बजाता है, गांजा पीता है और मुरदा फूँकता है। मुरदों को...
Vijay Sharma

घोष बाबू और उनकी माँ

"हम यहाँ से निकलकर कहाँ जाएँगे?" — शिल्पा ने अनिमेष के कंधे पर सिर रक्खे कहा।"जहाँ क़िस्मत ले जाए!" — अनिमेष की आवाज़ में...
Sleep, Death

थोड़ी बहुत मृत्यु

मृत्यु आयी और कल मेरी कहानी के एक पात्र को अपने संग ले गई अक्सर उसके घर के सामने से गुज़रते हुए मैं उधर देख लिया करता था अर्से से...

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नूइत ज़ारकी की कविता ‘विचित्रता’

नूइत ज़ारकी इज़राइली कवयित्री हैं जो विभिन्न साहित्य-सम्बन्धी पुरस्कारों से सम्मानित हैं। प्रस्तुत कविता उनकी हीब्रू कविता के तैल गोल्डफ़ाइन द्वारा किए गए अंग्रेज़ी...
Sunset

कितने प्रस्थान

सूरज अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया दिन-भर का चढ़ना उतरते हुए दृश्य को सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है यह संदेहयुक्त है अस्त होने की परिभाषा में कितना अस्त हो जाना दोबारा...
Naresh Mehta

कवच

मैं जानता हूँ तुम्हारा यह डर जो कि स्वाभाविक ही है, कि अगर तुम घर के बाहर पैर निकालोगे तो कहीं वैराट्य का सामना न हो जाए, तुम्हें...
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मैं

मैं एक तीर था जिसे सबने अपने तरकश में शामिल किया किसी ने चलाया नहींमैं एक फूल था टूटने को बेताब सबने मुझे देखा, मेरे रंगों की तारीफ़ की और मैं...
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कविताएँ: नवम्बर 2021

यात्री भ्रम कितना ख़ूबसूरत हो सकता है? इसका एक ही जवाब है मेरे पास कि तुम्हारे होने के भ्रम ने मुझे ज़िन्दा रखातुम्हारे होने के भ्रम में मैंने शहर...
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नहीं है तुम्हारी देह में यह रुधिर जिसके वर्ण में अब ढल रही है दिवा और अँधेरा सालता हैरोज़ थोड़ी मर रही आबादियों में रोज़ थोड़ी बढ़ रही...
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कहानी: 'सातवाँ आदमी' लेखक: हारुकी मुराकामी जापानी से अनुवाद: क्रिस्टोफ़र एलिशन हिन्दी अनुवाद: श्रीविलास सिंह"वह मेरी उम्र के दसवें वर्ष के दौरान सितम्बर का एक अपराह्न था...
Aashika Shivangi Singh

आशिका शिवांगी सिंह की कविताएँ

माँ-पिता प्रेमी-प्रेमिका नहीं बन सके मेरी माँ जब भी कहती है— "प्रेम विवाह ज़्यादा दिन नहीं चलते, टूट जाते हैं" तब अकस्मात ही मुझे याद आने लगते...
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कविता सरहदों के पार, हक़ीक़त के बीच दरार और कुछ बेतरतीब विचार

वरिष्ठ ताइवानी कवि एवं आलोचक ली मिन-युंग की कविताओं के हिन्दी अनुवाद का संकलन 'हक़ीक़त के बीच दरार' जुलाई में पाठकों तक पहुँचा। साहित्यिक...
Thaharti Sanson Ke Sirhane Se - Ananya Mukherjee

दुःख, दर्द और उम्मीद का मौसम (अनन्य मुखर्जी की कैंसर डायरी)

'ठहरती साँसों के सिरहाने से' अनन्या मुखर्जी की डायरी है जो उन्होंने 18 नवम्बर, 2018 को स्तन कैंसर से लड़ाई हार जाने से पहले...
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