Tag: Death

God, Abstract Human

ईश्वर की आँखें

क्या रह जाता है मृत्यु के बाद जब पार हो जाती है देहरी जीवितों और मृतों के बीच? क्या तब पार हो जाएँगी सारी सुबहें और रातें भी स्मृति...
Old age, Hand

पिता की मृत्यु

किसी अधलिखी चिट्ठी की तरह चले गए पिता सब कुछ बाक़ी रह गया धरा का धरा अब वह कभी पूरा नहीं हो पाएगा वो स्याही सूख रही है...
Bhagwat Rawat

इतनी बड़ी मृत्यु

आजकल हर कोई, कहीं न कहीं जाने लगा है हर एक को पकड़ना है चुपके-से कोई ट्रेन किसी को न हो कानों-कान ख़बर इस तरह पहुँचना है...
Vishnu Khare

अन्तिम

क्या याद आता होगा मृत्यु के प्रारम्भ में मर्मान्तक वेदना की लम्बी मौत या कृतज्ञ बेहोशी में या उससे कुछ पहले— एक बहुत नन्ही लड़की अँगुलियाँ पकड़ती हुई या पास...
Rituraj

एक बार में सब कुछ

कुछ भी छोड़कर मत जाओ इस संसार में अपना नाम तक भी वे अपने शोधार्थियों के साथ कुछ ऐसा अनुचित करेंगे कि तुम्हारे नाम की संलिप्तता उनमें नज़र...
Man, Peace

मृत्यु को नींद कहूँगा

अंतिम कविता मृत्यु पर नहीं लिखूँगा लिखूँगा जीवन पर 'अंधेरा है' को कहूँगा 'प्रकाश की अनुपस्थिति-भर' धोखे के क्षणों में याद करूँगा बारिश, हवा, सूरज मेरे अंदर जन्मती घृणा को बारिश...
Bhisham Sahni

मरने से पहले

मरने से एक दिन पहले तक उसे अपनी मौत का कोई पूर्वाभास नहीं था। हाँ, थोड़ी खीझ और थकान थी, पर फिर भी वह...
Sushant Supriye

सड़क की छाती पर कोलतार

सड़क की छाती पर कोलतार बिछा हुआ है। उस पर मज़दूरों के जत्थे की पदचाप है। इस दृश्य के उस पार उनके दुख-दर्द हैं।...
Ashok Vajpeyi

‘कहीं नहीं वहीं’ से कविताएँ

'कहीं नहीं वहीं' से कविताएँ सिर्फ़ नहीं नहीं, सिर्फ़ आत्मा ही नहीं झुलसेगी प्रेम में देह भी झुलस जाएगी उसकी आँच से नहीं, सिर्फ़ देह ही नहीं जलेगी अन्त्येष्टि में आत्मा भी...
Kailash Vajpeyi

जो है

बचपन में वह नास्तिक नहीं था, पिता को देखकर याद आ जाया करते थे देवता सुन रखी थीं जिनकी कहानियाँ माँ से, पत्थर हुई औरत का आख्यान पढ़कर उसने यह...
Ashok Vajpeyi

अन्त के बाद

'कहीं नहीं वहीं' से 1 अन्त के बाद हम चुपचाप नहीं बैठेंगे। फिर झगड़ेंगे। फिर खोजेंगे। फिर सीमा लांघेंगे। क्षिति जल पावक गगन समीर से फिर कहेंगे— चलो हमको रूप दो, आकार दो। वही जो पहले...
Sachidananda Routray

मसान का फूल

पोड़ा बसंत शासन (ब्राह्मणों का गाँव) का जगू तिवारी कीर्तन करता है, मृदंग बजाता है, गांजा पीता है और मुरदा फूँकता है। मुरदों को...
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