Tag: स्त्री

Traditional Woman leaning on wall

ब्रह्म-मुहूर्त

एक वे थीं कि जाग रहीं सदियों से उनकी नींदों में घुला था तारा भोर का आद्रा नक्षत्र की बाँह थामे दिन आरम्भ होता उनके अभ्यस्त हाथों से फिर...
Woman, River

नदी और स्त्री

स्त्री होना या होना नदी! क्या फ़र्क़ पड़ता है? दोनों ही उठतीं, गिरतीं बहतीं, रुकतीं एक बदलती धारा एक बदलती नियति। एक सोच एक धार मिल जाती है किसी न किसी सागर से और हो जाती है एकाकार सागर में अपने...
Naked Lady, Crouching Nude, Woman, Abstract

सच्ची कविता के लिए

वह जो अपने ही माँस की टोकरी सिर पर उठाए जा रही है और वह जो पिटने के बाद ही खुल पाती है अन्धकार की तरफ़ एक दरवाज़े-सी जैसे...
Mamta Kalia

लोग कहते हैं

लोग कहते हैं मैं अपना ग़ुस्सा कम करूँ समझदार औरतों की तरह सहूँ और चुप रहूँ। ग़ुस्सा कैसे कम किया जाता है? क्या यह चाट के ऊपर पड़ने...
Taslima Nasrin

और मत रखो अँधेरे में, देखने दो मुझे

मेरी इच्छा है कि सुबह से दोपहर, दोपहर से रात तक अकेली घूमती रहूँ। नदी के किनारे, गाँव के मैदान में, रोशनी में, शहर...
Maya Angelou

माया एंजेलो की कविता ‘मैं फिर भी उठती हूँ’

तुम मेरा इतिहास लिख सकते हो अपने कड़वे, मुड़े-तुड़े झूठों से तुम मुझे गंदगी में कुचल सकते हो फिर भी, धूल की तरह, मैं उठूँगी। क्या मेरी उन्मुक्तता...
Maya Angelou

माया एंजेलो की कविता ‘उदित हूँ मैं’

माया एंजेलो की कविता 'And Still I Rise' का अनुवाद कड़वे छली मृषा से इतिहास में तुम्हारे तुम्हारी लेखनी से मैं न्यूनतम दिखूँगी धूल-धूसरित भी कर सकते...
Two Indian Women standing

बहनें

कोयला हो चुकी हैं हम बहनों ने कहा रेत में धँसते हुए ढक दो अब हमें चाहे हम रुकती हैं यहाँ तुम जाओ बहनें दिन को...
Women sitting

बैठी हैं औरतें विलाप में

बैठी हैं एक साथ गठरी बन बिसूरतीं रोतीं, विलाप करतीं स्त्रियाँ करतीं शापित पूरे इतिहास को जिसमें उनके लिए अंधकार का मरुस्थल बिछा है बैठी हैं याद करतीं अपनी महान परम्परा को जिसमें थी...
R Chetankranti

सीलमपुर की लड़कियाँ

सीलमपुर की लड़कियाँ 'विटी' हो गईं लेकिन इससे पहले वे बूढ़ी हुई थीं जन्म से लेकर पन्द्रह साल की उम्र तक उन्होंने सारा परिश्रम बूढ़ा होने के...
Married Woman of India

भीख और स्नेह का फ़र्क़

हमने प्यार, दया का भीख और स्नेह का फ़र्क़ जाना नदियाँ खंगालीं, जंगल बुहारा। पीठ पर फिराए गए हाथों का शाबाशी और लिजलिजाहट का भेद जाना। हमने समन्दर की गहराइयों...
Woman Abstract

अब मैं औरत हूँ

मेरे आक़ा खिड़कियों के सुनहरे शीशे अब काले पड़ चुके हैं उधर मेरा रेशमी लिबास तार-तार कमरबन्द के चमकीले गोटे में पड़ चुकी फफून्द तुम्हारे दिए चाबुक के निशान मेरी पीठ से...
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