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राहुल बोयल की कविताएँ
1
एक देवी की प्रतिमा है - निर्वसन
पहन लिया है मास्क मुख पर
जबकि बग़ल में पड़ा है बुरखा
देवताओं ने अवसान की घड़ी में भी
जारी रखी...
ओम नागर की कविताएँ
प्रस्तुति: विजय राही
पिता की वर्णमाला
पिता के लिए काला अक्षर भैंस बराबर।
पिता नहीं गए कभी स्कूल
जो सीख पाते दुनिया की वर्णमाला।
पिता ने कभी नहीं किया
काली...
बाघ और इंसानी मुस्कान
एक दिन
होठों पर मुस्कान चिपकाए-चिपकाए
जब वह बहुत थक गया,
किसी ने उसे उस वर्षावन का पता दे दिया
जिसे अभयारण्य भी कहा जाता है
उससे कहा गया
जाओ,...
हम बोले रोटी
उन्होंने कहा—
देखो!
हमने देखा!
...वे ख़ुश हुए।
उन्होंने कहा—
सुनो!
वे बहुत ख़ुश हुए!
उन्होंने कहा—
खड़े रहो!
हम खड़े रहे!
वे बहुत ही ख़ुश हुए।
उन्होंने कहा—
बोलो!
हमने कहा— 'रोटी'!
वे नाराज़ हुए!
बहुत नाराज हुए!!
बहुत ही...
भात दे, हरामज़ादे
'Bhaat De Haramzade', a poem by Rafiq Azad
बांग्ला से अनुवाद: अमिताभ चक्रवर्ती
बहुत भूखा हूँ, पेट के भीतर लगी है आग, शरीर की समस्त क्रियाओं...
भूख
कोई बड़ी बात नहीं, महसूस करना
किसी भूखे इंसान का दर्द
जब भूख से जल रही हों
अंतड़ियाँ खुद की
बल्कि
भरपेट भोजन मिलने पर भी
अगर महसूस करते हो
किसी...
प्रेम और भूख
प्रेम लाचार रहा है हर युग में भूख के आगे
भूख से बेहाल को प्रबुद्ध होते देखा जाना दुर्लभ है
भरा होगा जिसका पेट,
प्रेम की बड़ी...
रोटी
रोटी पापी पेट का प्रथम पुण्य है
जो सर्वप्रथम धरती के हिस्से आता है
उसके बाद किसान के।
रोटी मनुष्य की रची कृपा है
जो गाय और कुत्ते...






