Ignou MA Hindi Study Material, Ignou MA Hindi, Ignou Hindi, Ignou Upanyaas evam Kahani. Read here the literature pieces from the syllabus of Ignou MA Hindi.
Tag: IGNOU MA Hindi Study Material (MHD)
बहिर्गमन
"मैं एक पुख्ता आदमी बनने की अभिलाषा लेकर पिछले पच्चीस वर्षों से कछुआ बना हुआ हूँ।"
"मैं हिल नहीं रहा हूँ और मुझे अपनी उबासी-भरी दुनिया से मोह है।"
"वह किसी भी अवस्था में बैठा हो, यही लगता है वह मंच पर सक्रिय है। मैं समझ गया, वह गुसलखाने में भी अशांत रहता होगा, और हाथ-पैर फेंकने, मुट्ठियाँ कसकर, जबड़े भींचकर कुछ बोलने के बाद ही एक लोटा पानी बदन पर डालता होगा।"
"पच्चीस-तीस साल का नौजवान इस देश में अगर फूले हुए पेट का रोगी हो तो आपको उस पर शक करने का पूरा हक है।"
"उनमें प्रथम कोटि का रूमानी सुनसान था—किसी निर्जन में लगे लैम्प पोस्ट की तरह जिसके शीर्ष पर काँच मढ़ा हो और जहाँ प्रकाश को महज सुंदर बनाकर बेकार कर दिया गया हो।"
"तुम्हारी इस आजादी से कभी मुठभेड़ नहीं हुई इसलिए अपनी गुलामी तुम्हें कभी नागवार नहीं लगेगी।"
पछाड़ दिया मेरे आस्तिक ने
शुरू-शुरू कातिक में
निशा शेष ओस की बूँदियों से लदी है
अगहनी धान की दुद्धी मंजरियाँ
पाकर परस प्रभाती किरणों का
मुखर हो उठेगा इनका अभिराम रूप...
टहलने निकला...
समाधि-लेख
'Samadhi Lekh', a poem by Shrikant Verma
हवा में झूल रही है एक डाल : कुछ चिड़ियाँ
कुछ और चिड़ियों से पूछती हैं हाल
एक स्त्री आईने के...
मलबे का मालिक
"वली, यह मस्जिद ज्यों की त्यों खड़ी है? इन लोगों ने इसका गुरुद्वारा नहीं बना दिया!"
"चुप कर, ख़सम-खाने! रोएगा, तो वह मुसलमान तुझे पकड़कर ले जाएगा! कह रही हूँ, चुप कर!"
"आजकल लाहौर का क्या हाल है? अनारकली में अब पहले जितनी रौनक होती है या नहीं? सुना है, शाहालमीगेट का बाज़ार पूरा नया बना है? कृष्णनगर में तो कोई ख़ास तब्दीली नहीं आयी? वहाँ का रिश्वतपुरा क्या वाकई रिश्वत के पैसे से बना है?... कहते हैं, पाकिस्तान में अब बुर्का बिल्कुल उड़ गया है, यह ठीक है?..."
यही सच है
"मुझे डर है कि जिस आधार पर मैं तुमसे नफरत करती थी, उसी आधार पर कहीं मुझे अपने से नफरत न करनी पड़े।"
पैदल आदमी
जब सीमा के इस पार पड़ी थीं लाशें
तब सीमा के उस पार पड़ी थीं लाशें
सिकुड़ी ठिठरी नंगी अनजानी लाशें
वे उधर से इधर आ करके...
अंधी पिस्तौल
सुरक्षा अधिकारी सेनाधिपति के
घूर कर देखते हैं मेरा चेहरा
बहुत दिनों से उन्होंने नहीं देखा है मेरा चेहरा
धीरे-धीरे कम होती गयी है मेरी और सेनाधिपति की
बातचीत
इसलिए...
राजकमल चौधरी
सोहर की पंक्तियों का रस
(चमड़े की निर्जनता को गीला करने के लिए)
नये सिरे से सोखने लगती हैं
जाँघों में बढ़ती हुई लालचे से
भविष्य के रंगीन...
हंसा जाई अकेला
"घर की अँधेरी भँडरिया। दोनों भटकते हैं। हंसा कुछ बताता है। सुशीला जी कुछ सुनती हैं। आँख कुछ देखती है। हाथ कुछ टटोलते हैं। बहरहाल, पता नहीं कहाँ क्या है?"
"अँधेरे में जैसे आँख, तैसे बेआँख। दोनों को सहारा चाहिए।"
रावण भाषण देने लगा, "भाइयों! राम राजा था। देखो, छोटी जात का कोई कभी राम नहीं बनने पाता है। राक्षस सब बनते हैं। बिराहिम, कालू, भुलई, फेद्दर, सभी की पालटी है, हमारी। यह जनता की लड़ाई है। बोल दो धावा।" और हंसा हाथ-पाँव हिलाता आगे को चल पड़ा। पीछे-पीछे सारी राक्षसी सेना। किसानों के बंदर बने लड़के भी अपना चेहरा लगाये, गदा लिये, जनता की पार्टी में शामिल हो गये। राम बेचारे अकेले बैठे रह गये। रामायण बंद हो गयी। तिवारी चिल्लाने लगा, पर कौन सुनता है!
बिरादरी
वहाँ पहुँचते ही मुझे लगा कि आना गलत था। बिल्कुल गलत। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी और लौटना मुमकिन नहीं था। मैं...
बदबू
"घोड़े के पीछे, और अफसर के आगे कौन समझदार जाएगा? एक आदमी के कारण इतने लोगों का नुकसान हो गया, ऐसे लड़ने-भिड़ने को ही जवानी बना रखी हो, तो आदमी दंगल करे, अखाड़े में जाए। नौकरी में तो नौकर की ही तरह रहना चाहिए।"
"दूसरी बार मिट्टी लगाने से पहले उसने हाथों को सूँघा और अनुभव किया कि हाथों की गंध मिट चुकी है। सहसा एक विचित्र आतंक से उसका समूचा शरीर सिहर उठा। उसे लगा आज वह भी घासी की तरह इस बदबू का आदी हो गया है।"
लुभाना
बड़ी किसी को लुभा रही थी
चालिस के ऊपर की औरत
घड़ी घड़ी खिलखिला रही थी
चालिस के ऊपर की औरत
खड़ी अगर होती वह थककर
चालिस के ऊपर...










