Tag: IGNOU MA Hindi Study Material (MHD)

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क्यों मुझे प्रिय हों न बन्धन

क्यों मुझे प्रिय हों न बन्धन! बन गया तम-सिन्धु का, आलोक सतरंगी पुलिन सा, रजभरे जग-बाल से है, अंक विद्युत् का मलिन-सा, स्मृति-पटल पर कर रहा अब, वह स्वयं...
Raghuvir Sahay

कविता बन जाती है

हम लोग रोज़ खाते और जागते और सोते हैं कोई कविता नहीं मिलती है जैसे ही हमारा रिश्ता किसी से भी साफ़ होने लगता है कविता बन...
Shrikant Verma

जलसाघर

यही सोचते हुए गुज़र रहा हूँ मैं कि गुज़र गयी बग़ल से गोली दनाक से। राहजनी हो या क्रान्ति? जो भी हो, मुझको गुज़रना ही रहा है शेष। देश नक़्शे में देखता...

रोटी और संसद

एक आदमी रोटी बेलता है एक आदमी रोटी खाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है वह सिर्फ़ रोटी से खेलता...
People sitting and having food in village

लटकी हुई शर्त

"दुसाध को लड़की की शादी करनी है तो दुसाध ही खोजेगा। चमार को लड़की की शादी करनी है तो चमार ही खोजेगा। फिर, यह 'हरिजन-हरिजन' करने से इन बारीकियों का पता कैसे चलेगा?"
Shamser Bahadur Singh

उषा

कविता संग्रह: 'टूटी हुई बिखरी हुई' प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे भोर का नभ राख से लीपा हुआ चौका (अभी गीला पड़ा है) बहुत काली सिल ज़रा...
Raghuvir Sahay

आज का पाठ है

आज का पाठ है—मृत्यु के साधारण तथ्य अनेक हैं; मुख्य लिखो वह सब को एक-सी नहीं आती न सब मृत्यु के बाद एक हो जाते हैं वैसे ही...
Mohandas Naimishrai

आवाज़ें

"ब्राह्मण का लड़का चाहे वह अभी ढंग से नाक साफ करना भी न सीख पाया हो, लेकिन साठ साल के बूढ़े तक उसे 'पंडितजी पालागन' कहकर आदर प्रकट करते हैं। इतवारी की उम्र पचास से ऊपर ही होगी और सामने खड़े कारिन्दे की अट्ठाइस के करीब। उम्र में आधे का फर्क, किन्तु जातिगत असमानता भला शिष्टाचार कहाँ निभाने देती है।"
Om Prakash Valmiki

पच्चीस चौका डेढ़ सौ

"सुदीप जब भी किसी को गिड़गिड़ाते देखता है तो उसे अपने पिताजी की छवि याद आने लगती है!"

विरह का जलजात जीवन

'Virah Ka Jaljat Jivan', a poem by Mahadevi Verma विरह का जलजात जीवन, विरह का जलजात! वेदना में जन्म, करुणा में मिला आवास अश्रु चुनता दिवस इसका,...
Raghuvir Sahay

अभी जीना है

मुझे अभी जीना है कविता के लिए नहीं कुछ करने के लिए कि मेरी संतान मौत कुत्ते की न मरे मैं आत्महत्या के पक्ष में नहीं...
Raghuvir Sahay

सड़क पर रपट

देखो सड़क पार करता है पतला दुबला बोदा आदमी आती हुई टरक का इसको डर नहीं या कि जल्दी चलने का इसमें दम नहीं रहा आँख उठा...
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