Ignou MA Hindi Study Material, Ignou MA Hindi, Ignou Hindi, Ignou Upanyaas evam Kahani. Read here the literature pieces from the syllabus of Ignou MA Hindi.
Tag: IGNOU MA Hindi Study Material (MHD)
क्यों मुझे प्रिय हों न बन्धन
क्यों मुझे प्रिय हों न बन्धन!
बन गया तम-सिन्धु का, आलोक सतरंगी पुलिन सा,
रजभरे जग-बाल से है, अंक विद्युत् का मलिन-सा,
स्मृति-पटल पर कर रहा अब,
वह स्वयं...
कविता बन जाती है
हम लोग रोज़ खाते और जागते और सोते हैं
कोई कविता नहीं मिलती है
जैसे ही हमारा रिश्ता किसी से भी साफ़ होने लगता है
कविता बन...
जलसाघर
यही सोचते हुए गुज़र रहा हूँ मैं कि गुज़र गयी
बग़ल से
गोली दनाक से।
राहजनी हो या क्रान्ति? जो भी हो, मुझको
गुज़रना ही रहा है
शेष।
देश
नक़्शे में
देखता...
रोटी और संसद
एक आदमी
रोटी बेलता है
एक आदमी रोटी खाता है
एक तीसरा आदमी भी है
जो न रोटी बेलता है, न रोटी खाता है
वह सिर्फ़ रोटी से खेलता...
लटकी हुई शर्त
"दुसाध को लड़की की शादी करनी है तो दुसाध ही खोजेगा। चमार को लड़की की शादी करनी है तो चमार ही खोजेगा। फिर, यह 'हरिजन-हरिजन' करने से इन बारीकियों का पता कैसे चलेगा?"
उषा
कविता संग्रह: 'टूटी हुई बिखरी हुई'
प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)
बहुत काली सिल ज़रा...
आज का पाठ है
आज का पाठ है—मृत्यु के साधारण तथ्य
अनेक हैं; मुख्य लिखो
वह सब को एक-सी नहीं आती
न सब मृत्यु के बाद एक हो जाते हैं
वैसे ही...
आवाज़ें
"ब्राह्मण का लड़का चाहे वह अभी ढंग से नाक साफ करना भी न सीख पाया हो, लेकिन साठ साल के बूढ़े तक उसे 'पंडितजी पालागन' कहकर आदर प्रकट करते हैं। इतवारी की उम्र पचास से ऊपर ही होगी और सामने खड़े कारिन्दे की अट्ठाइस के करीब। उम्र में आधे का फर्क, किन्तु जातिगत असमानता भला शिष्टाचार कहाँ निभाने देती है।"
पच्चीस चौका डेढ़ सौ
"सुदीप जब भी किसी को गिड़गिड़ाते देखता है तो उसे अपने पिताजी की छवि याद आने लगती है!"
विरह का जलजात जीवन
'Virah Ka Jaljat Jivan', a poem by Mahadevi Verma
विरह का जलजात जीवन, विरह का जलजात!
वेदना में जन्म, करुणा में मिला आवास
अश्रु चुनता दिवस इसका,...
अभी जीना है
मुझे अभी जीना है कविता के लिए नहीं
कुछ करने के लिए कि मेरी संतान मौत कुत्ते की न मरे
मैं आत्महत्या के पक्ष में नहीं...
सड़क पर रपट
देखो सड़क पार करता है पतला दुबला बोदा आदमी
आती हुई टरक का इसको डर नहीं
या कि जल्दी चलने का इसमें दम नहीं रहा
आँख उठा...






