Tag: life
आज सुबह ही
आज सुबह ही
मिट्टी खोदी
घास उखाड़ी
पानी डाला
सुबह-सुबह की धूप देखकर
सही जगह पर क़लम लगायी
खीझ रहा था कई दिनों से
मन के भीतर
इस जीवन पर
अस्थिर होकर घूम...
जीवन की ही जय है
मृषा मृत्यु का भय है
जीवन की ही जय है।
जीव की जड़ जमा रहा है
नित नव वैभव कमा रहा है
पिता पुत्र में समा रहा है
यह...
स्वगत
वही—
जिसे भींच रहे हो मुट्ठी में
लेकिन जो टूट-बिखर जाता है बार-बार—
जीवन है।
कभी रेत और कभी बर्फ़
कभी आँच और कभी सुरसुरी की तरह
अँगुलियों के बीच...
अपेक्षाओं के बियाबान
सिलीगुड़ी
4 फ़रवरी, 70
आदरणीय दादा
सादर प्रणाम
कल रात फिर वही स्वप्न देखा। मैं और सुरभित समुद्र किनारे क़दमों के निशान छोड़ते बढ़े जा रहे हैं। अपर्णा...
काम, गंगाराम कुम्हार
काम
मेरे पास दो हाथ हैं—
दोनों काम के अभाव में
तन से चिपके निठल्ले लटके रहते हैं!
इस देश की स्त्रियों के पास इतने काम हैं—
भोर से...
मन, कितना अभिनय शेष रहा?
मन,
कितना अभिनय शेष रहा?
सारा जीवन जी लिया, ठीक
जैसा तेरा आदेश रहा!
बेटा, पति, पिता, पितामह सब
इस मिट्टी के उपनाम रहे,
जितने सूरज उगते देखो
उससे ज़्यादा संग्राम...
ज़िन्दगी से डरते हो
ज़िन्दगी से डरते हो!
ज़िन्दगी तो तुम भी हो, ज़िन्दगी तो हम भी हैं!
ज़िन्दगी से डरते हो?
आदमी से डरते हो
आदमी तो तुम भी हो, आदमी...
तेरी-मेरी ज़िन्दगी का गीत एक है
तेरी-मेरी ज़िन्दगी का गीत एक है
क्या हुआ जो
रागिनी को पीर भा गई
क्या हुआ जो
चाँदनी को नींद आ गई
स्याह घाटियों में कोई बात खो गई
क्या...
ये असंगति ज़िन्दगी के द्वार सौ-सौ बार रोयी
ये असंगति ज़िन्दगी के द्वार सौ-सौ बार रोयी
बाँह में है और कोई, चाह में है और कोई
साँप के आलिंगनों में
मौन चन्दन तन पड़े हैं
सेज...
कमाल का स्वप्न, नींद, प्रतीक्षारत
कमाल का स्वप्न
जीवन के विषय में पूछे जाने पर
दृढ़ता से कह सकता हूँ मैं
कमाल का स्वप्न था..
जैसा देखा, हुआ नहीं
जैसा हुआ, देखा नहीं!
नींद
कहानी सुनाकर
दादी...
मृत्युंजय
जीवन नहीं देखता
रंग-रूप, जात-पात
धरती के हृदय से
कई फूल खिलते हैं!
कुछ मुरझाए फूलों को भी
धरती दाना-पानी देती है,
हवा नहीं रुकती किसी पर
आक्रोशित होकर,
वर्षा होती ही...
वह क्या है?
वह क्या है
जो एक औरत पालती है
अपने बच्चों को बारी-बारी से
गर्भ में लम्बे नौ महीने तक
और एक दिन उन्हें ही अपने साथ ले
कुएँ में...











