Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Girl, Woman, Village

अलगनी पर टँगे दुःख

हर औरत ने पोषित किया प्रेम अपने तरीक़े से मेरी गली की राजाबो दिखती थीं प्रेम से तृप्त जब पति बनारसी साड़ियों के लिए रेशमी धागे...
Girl Reflection Water

मैं तुम्हें भूलने के पथ पर हूँ

मैं तुम्हें भूलने के पथ पर हूँ मुझे परवाह नहीं यदि भूल जाऊँ अपनी लिखी सारी पंक्तियाँ मैं लगातार चलती जा रही हूँ मेरे पीछे उठा मानसून भी...

धनिकों के तो धन हैं लाखों

धनिकों के तो धन हैं लाखों मुझ निर्धन के धन बस तुम हो! कोई पहने माणिक माल कोई लाल जुड़ावे कोई रचे महावर मेहँदी मुतियन माँग भरावे सोने वाले, चाँदी वाले पानी...
Sandeep Pareek Nirbhay

जाँघों के बीच

कल अरसे बाद उसके वहाँ गया था महाजन गाँव की मटकी का ठण्डा पानी पीते वक़्त सुनायी दी मुझे हारमोनियम की मीठी आवाज़ और धौंकनी चला रहे हाथ से आ...
Gyanendrapati

ट्राम में एक याद

चेतना पारीक कैसी हो? पहले जैसी हो? कुछ-कुछ ख़ुुश कुछ-कुछ उदास कभी देखती तारे कभी देखती घास चेतना पारीक, कैसी दिखती हो? अब भी कविता लिखती हो? तुम्हें मेरी याद तो न...
Kumar Vikal

एक प्रेम कविता

यह गाड़ी अमृतसर को जाएगी तुम इसमें बैठ जाओ मैं तो दिल्ली की गाड़ी पकड़ूँगा हाँ, यदि तुम चाहो तो मेरे साथ दिल्ली भी चल सकती हो मैं तुम्हें अपनी...
Shalabh Shriram Singh

औरों की तरह नहीं

अपने पिता की तरह कैसे कर सकता हूँ प्यार मैं? अपने भाई की तरह कैसे? कैसे कर सकता हूँ प्यार अपने पुत्र की तरह? मित्र की तरह...
Bodies, Sensual, Intimacy, Tattoo, Flower, Back, Lesbian, Body, Touch

प्यार का वक़्त

वह या तो बीच का वक़्त होता है या पहले का। जब भी लड़ाई के दौरान साँस लेने का मौक़ा मिल जाए। उस वक़्त जब मैं तुम्हारी बन्द पलकें बेतहाशा चूम रहा...
Rajkamal Chaudhary

रात्रिदग्ध एकालाप

1 बारूद के कोहरे में डूब गए हैं पहाड़, नदी, मकान, शहर के शहर। बीवी से छिपाकर बैंक में पैसे डालने का मतलब नहीं रह गया है अब। 2 मुझे चुप...
Bhisham Sahni

चीलें

चील ने फिर से झपट्टा मारा है। ऊपर, आकाश में मण्डरा रही थी जब सहसा, अर्द्धवृत्त बनाती हुई तेज़ी से नीचे उतरी और एक...
Paash

अब विदा लेता हूँ

अब विदा लेता हूँ मेरी दोस्त, मैं अब विदा लेता हूँ मैंने एक कविता लिखनी चाही थी सारी उम्र जिसे तुम पढ़ती रह सकतीं उस कविता में महकते हुए...
Chandrakant Devtale

मैं आता रहूँगा तुम्हारे लिए

मेरे होने के प्रगाढ़ अन्धेरे को पता नहीं कैसे जगमगा देती हो तुम अपने देखने भर के करिश्मे से कुछ तो है तुम्हारे भीतर जिससे अपने बियाबान सन्नाटे को तुम...
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