Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
अलगनी पर टँगे दुःख
हर औरत ने पोषित किया प्रेम अपने तरीक़े से
मेरी गली की राजाबो दिखती थीं प्रेम से तृप्त
जब पति बनारसी साड़ियों के लिए रेशमी धागे...
मैं तुम्हें भूलने के पथ पर हूँ
मैं तुम्हें भूलने के पथ पर हूँ
मुझे परवाह नहीं यदि भूल जाऊँ
अपनी लिखी सारी पंक्तियाँ
मैं लगातार चलती जा रही हूँ
मेरे पीछे उठा मानसून भी...
धनिकों के तो धन हैं लाखों
धनिकों के तो धन हैं लाखों
मुझ निर्धन के धन बस तुम हो!
कोई पहने माणिक माल
कोई लाल जुड़ावे
कोई रचे महावर मेहँदी
मुतियन माँग भरावे
सोने वाले, चाँदी वाले
पानी...
जाँघों के बीच
कल अरसे बाद उसके वहाँ गया था
महाजन गाँव की मटकी का
ठण्डा पानी पीते वक़्त
सुनायी दी मुझे
हारमोनियम की मीठी आवाज़
और धौंकनी चला रहे हाथ से आ...
ट्राम में एक याद
चेतना पारीक कैसी हो?
पहले जैसी हो?
कुछ-कुछ ख़ुुश
कुछ-कुछ उदास
कभी देखती तारे
कभी देखती घास
चेतना पारीक, कैसी दिखती हो?
अब भी कविता लिखती हो?
तुम्हें मेरी याद तो न...
एक प्रेम कविता
यह गाड़ी अमृतसर को जाएगी
तुम इसमें बैठ जाओ
मैं तो दिल्ली की गाड़ी पकड़ूँगा
हाँ, यदि तुम चाहो
तो मेरे साथ
दिल्ली भी चल सकती हो
मैं तुम्हें अपनी...
औरों की तरह नहीं
अपने पिता की तरह कैसे कर सकता हूँ प्यार मैं?
अपने भाई की तरह कैसे?
कैसे कर सकता हूँ प्यार अपने पुत्र की तरह?
मित्र की तरह...
प्यार का वक़्त
वह
या तो बीच का वक़्त होता है
या पहले का। जब भी
लड़ाई के दौरान
साँस लेने का मौक़ा मिल जाए।
उस वक़्त
जब
मैं
तुम्हारी बन्द पलकें बेतहाशा चूम रहा...
रात्रिदग्ध एकालाप
1
बारूद के कोहरे में डूब गए हैं पहाड़,
नदी, मकान, शहर के शहर।
बीवी से छिपाकर बैंक में पैसे डालने
का मतलब नहीं रह गया है
अब।
2
मुझे चुप...
चीलें
चील ने फिर से झपट्टा मारा है। ऊपर, आकाश में मण्डरा रही थी जब सहसा, अर्द्धवृत्त बनाती हुई तेज़ी से नीचे उतरी और एक...
अब विदा लेता हूँ
अब विदा लेता हूँ
मेरी दोस्त, मैं अब विदा लेता हूँ
मैंने एक कविता लिखनी चाही थी
सारी उम्र जिसे तुम पढ़ती रह सकतीं
उस कविता में
महकते हुए...
मैं आता रहूँगा तुम्हारे लिए
मेरे होने के प्रगाढ़ अन्धेरे को
पता नहीं कैसे जगमगा देती हो तुम
अपने देखने भर के करिश्मे से
कुछ तो है तुम्हारे भीतर
जिससे अपने बियाबान सन्नाटे को
तुम...










