Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Man, Woman, Butterfly, Abstract, Merge

आहट

सच कहो तो अब करनी होगी खुलकर बात कि ठीक कौन-सा क्षण था वह जब फूलों ने डाल दी थीं गर्दनें और एक सिसकी बहुत धीमे-से फूट पड़ी थी डाल-डाल से वैसे...
premchand

अनिष्ट शंका

चाँदनी रात, समीर के सुखद झोंके, सुरम्य उद्यान। कुँवर अमरनाथ अपनी विस्तीर्ण छत पर लेटे हुए मनोरमा से कह रहे थे— "तुम घबराओ नहीं,...
Parveen Shakir

इतना मालूम है

अपने बिस्तर पे बहुत देर से मैं नीम-दराज़ सोचती थी कि वो इस वक़्त कहाँ पर होगा मैं यहाँ हूँ मगर उस कूचा-ए-रंग-ओ-बू में रोज़ की तरह...
Holding Hands, Couple, Love, Together

साथ-साथ, जाड़े की एक शाम

साथ-साथ हमने साथ-साथ आँखें खोलीं, देखा बालकनी के उस पार उगते सूरज को, टहनी पर खिले अकेले गुलाब पर साथ-साथ ही पानी डाला, पीली पड़ चुकी पत्तियों को आहिस्ता से किया विलग, साथ-साथ देखी टीवी पर मिस्टर एण्ड मिसिज़...
Maun Sonchiri - Pratibha Sharma

प्रेम का अबेकस

1 प्रेम को खोने के बाद सबसे मुश्किल है कैलेण्डर पर वर्ष गिनना और तारीख़ों के दिन दोहराना यह ऐसा है जैसे समय की आइसक्रीम में से स्कूप...
Kirti Chaudhary

मुझे मना है

बिखरा है रंग, रूप, गंध, रस मेरे आगे मुझे मना है किंतु गंध को अंग लगाना, ख़ुशियों के चमकीले दामन को आगे बढ़कर छू आना, रस पीना, छक जाना, लुब्ध...
Amrita Pritam

याद

आज सूरज ने कुछ घबराकर रोशनी की एक खिड़की खोली बादल की एक खिड़की बन्द की और अँधेरे की सीढ़ियाँ उतर गया आसमान की भवों पर...
Muktibodh

बहुत दिनों से

मैं बहुत दिनों से, बहुत दिनों से बहुत-बहुत-सी बातें तुमसे चाह रहा था कहना और कि साथ यों साथ-साथ फिर बहना, बहना, बहना मेघों की आवाज़ों से कुहरे की...
Fahmida Riaz

अब सो जाओ

अब सो जाओ और अपने हाथ को मेरे हाथ में रहने दो तुम चाँद से माथे वाले हो और अच्छी क़िस्मत रखते हो बच्चे की सी भोली सूरत अब तक...
Man, Peace

तहज़ीबें चकित तुम्हें देखकर

मैं हैरान और निहाल हूँ तुम्हें देखकर, जीवन में मैंने तुमसे बड़ा अचरज नहीं देखा! तुम नदी से बातें कर सकते हो चिड़िया के साथ गा सकते...
Keshav Sharan

कविताएँ: अगस्त 2020

व्यापार और प्यार: एक गणित यह जो हम लेते हैं यह जो हम देते हैं व्यापार है इसमें से घटा दो अगर लाभ-हानि का जो विचार है तो बाक़ी बचा प्यार है! फिर प्यार में जोड़...
Amrita Pritam

तू नहीं आया

चैत ने करवट ली, रंगों के मेले के लिए फूलों ने रेशम बटोरा—तू नहीं आया दोपहरें लम्बी हो गईं, दाखों को लाली छू गई दराँती ने गेहूँ...
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