Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
पिछली रात की वह प्रात
तुम्हारी आँख के आँसू हमारी आँख में
तुम्हारी आँख मेरी आँख में
तुम्हारा धड़कता सौन्दर्य
मेरी पसलियों की छाँव में
तुम्हारी नींद मेरे जागरण के पार्श्व में
तुम्हारी करवटें...
कविताएँ: अगस्त 2020
सहूलियत
मुझे ज़िन्दगी के लिए सारी सहूलियत हासिल हुई
मगर ज़िन्दगी—
उसका कुछ अता-पता न था!
जो था इस जिस्म की नौ-नाली में
वह विज्ञान की दृष्टि से क़तई...
एक में अनेक
उस युवती के अंदर अनेक युवतियाँ थीं
मेरे भीतर भी थे कई पुरुष
उस दिन हमने एक-दूसरे को नहीं देखा
कहने का अर्थ एक ने एक को...
फिर छिड़ी रात बात फूलों की
फिर छिड़ी रात बात फूलों की
रात है या बरात फूलों की
फूल के हार, फूल के गजरे
शाम फूलों की, रात फूलों की
आप का साथ, साथ...
ये शब्द वही हैं
यह जगह वही है
जहाँ कभी मैंने जन्म लिया होगा
इस जन्म से पहले
यह मौसम वही है
जिसमें कभी मैंने प्यार किया होगा
इस प्यार से पहले
यह समय...
कविताएँ: अगस्त 2020
सुनो मछुआरे
सुनो मछुआरे
जितने जुगनू
तुम्हारी आँखों में
चमक रहे हैं न
टिम-टिम
तारों के जैसे,
वे क्या
हमेशा चमकते रहते हैं
इसी तरह?
सुनो मछुआरे
जब तुम
जाल फेंकते हो
सागर में,
तुम्हारी बाँहों की मछलियाँ
मचल-मचल...
चाँद-रात
गए बरस की ईद का दिन क्या अच्छा था
चाँद को देखके उसका चेहरा देखा था
फ़ज़ा में 'कीट्स' के लहजे की नरमाहट थी
मौसम अपने रंग...
प्रेम का अबेकस (दूसरा भाग)
1
प्रेम से क्रोध तक
आग से आश्रय तक
विश्वास करने के विपरीत क्या है?
उसके लायक़ भी कुछ नही
जैसे चाँदी की एक शानदार सुई चमकती है सफ़ेद परिधि में
प्रेम...
अब्राहिम लिंकन का पत्र मेरी ऑवेंस के नाम
यह पत्र लिंकन ने राष्ट्रपति बनने से बहुत पूर्व अपनी युवावस्था में लिखा था।
स्प्रिंग-फ़ील्ड,
7 मई, 1837
मित्र मेरी,
प्रस्तुत पत्र से पहले मैंने दो चिट्ठियाँ लिखनी आरम्भ...
एक-दूसरे से हैं कितने दूर
एक-दूसरे से हैं कितने दूर कि जैसे
बीच सिन्धु है, एक देश के शैल-कूल पर खड़ा हुआ मैं
और दूसरे देश-तीर पर खड़ी हुईं तुम।
फिर भी...
नदी, स्वप्न और तुम्हारा पता
मैं जग रहा हूँ
आँखों में गाढ़ी-चिपचिपी नींद भरे
कि नींद मेरे विकल्पों की सूची में खो गयी है कहीं।
जिस बिस्तर पर मैं लेटा
चाहे-अनचाहे मेरी उपस्थिति...
मीनाक्षी मिश्र की कविताएँ
अपना पसंदीदा संगीत सुनते हुए
अपना पसंदीदा संगीत सुनते हुए मैंने जाना
जब कोई धुन पहुँचती है गंतव्य तक सही-सलामत
तब पैर थिरकने से पहले
थिरकती है आत्मा
जीवन...











