Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Doodhnath Singh

पिछली रात की वह प्रात

तुम्हारी आँख के आँसू हमारी आँख में तुम्हारी आँख मेरी आँख में तुम्हारा धड़कता सौन्दर्य मेरी पसलियों की छाँव में तुम्हारी नींद मेरे जागरण के पार्श्व में तुम्हारी करवटें...
Rahul Boyal

कविताएँ: अगस्त 2020

सहूलियत मुझे ज़िन्दगी के लिए सारी सहूलियत हासिल हुई मगर ज़िन्दगी— उसका कुछ अता-पता न था! जो था इस जिस्म की नौ-नाली में वह विज्ञान की दृष्टि से क़तई...
Markanday Rai Neerav

एक में अनेक

उस युवती के अंदर अनेक युवतियाँ थीं मेरे भीतर भी थे कई पुरुष उस दिन हमने एक-दूसरे को नहीं देखा कहने का अर्थ एक ने एक को...
Makhdoom Mohiuddin

फिर छिड़ी रात बात फूलों की

फिर छिड़ी रात बात फूलों की रात है या बरात फूलों की फूल के हार, फूल के गजरे शाम फूलों की, रात फूलों की आप का साथ, साथ...
Kunwar Narayan

ये शब्द वही हैं

यह जगह वही है जहाँ कभी मैंने जन्म लिया होगा इस जन्म से पहले यह मौसम वही है जिसमें कभी मैंने प्यार किया होगा इस प्यार से पहले यह समय...
Pallavi Mukherjee

कविताएँ: अगस्त 2020

सुनो मछुआरे सुनो मछुआरे जितने जुगनू तुम्हारी आँखों में चमक रहे हैं न टिम-टिम तारों के जैसे, वे क्या हमेशा चमकते रहते हैं इसी तरह? सुनो मछुआरे जब तुम जाल फेंकते हो सागर में, तुम्हारी बाँहों की मछलियाँ मचल-मचल...
Parveen Shakir

चाँद-रात

गए बरस की ईद का दिन क्या अच्छा था चाँद को देखके उसका चेहरा देखा था फ़ज़ा में 'कीट्स' के लहजे की नरमाहट थी मौसम अपने रंग...
Earth Woman

प्रेम का अबेकस (दूसरा भाग)

1 प्रेम से क्रोध तक आग से आश्रय तक विश्वास करने के विपरीत क्या है? उसके लायक़ भी कुछ नही जैसे चाँदी की एक शानदार सुई चमकती है सफ़ेद परिधि में प्रेम...
Abraham Lincoln, Mary Owens

अब्राहिम लिंकन का पत्र मेरी ऑवेंस के नाम

यह पत्र लिंकन ने राष्ट्रपति बनने से बहुत पूर्व अपनी युवावस्था में लिखा था। स्प्रिंग-फ़ील्ड, 7 मई, 1837 मित्र मेरी, प्रस्तुत पत्र से पहले मैंने दो चिट्ठियाँ लिखनी आरम्भ...
Muktibodh

एक-दूसरे से हैं कितने दूर

एक-दूसरे से हैं कितने दूर कि जैसे बीच सिन्धु है, एक देश के शैल-कूल पर खड़ा हुआ मैं और दूसरे देश-तीर पर खड़ी हुईं तुम। फिर भी...
Leaf Water River

नदी, स्वप्न और तुम्हारा पता

मैं जग रहा हूँ आँखों में गाढ़ी-चिपचिपी नींद भरे कि नींद मेरे विकल्पों की सूची में खो गयी है कहीं। जिस बिस्तर पर मैं लेटा चाहे-अनचाहे मेरी उपस्थिति...
Woman holding leaf

मीनाक्षी मिश्र की कविताएँ

अपना पसंदीदा संगीत सुनते हुए अपना पसंदीदा संगीत सुनते हुए मैंने जाना जब कोई धुन पहुँचती है गंतव्य तक सही-सलामत तब पैर थिरकने से पहले थिरकती है आत्मा जीवन...
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