Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Faheem Ahmad

फहीम अहमद की कविताएँ

मेरी हथेलियों में सारे रस्ते वो मुस्कान लाने वाली एक पंक्ति कसमसाती रही 1 बाप के झुके हुए काँधे अंदर धँसते जा रहे गाल माथे की फड़फड़ाती हुई नसों को देखकर मैं...
Sharad Billore

भाषा

पृथ्वी के अन्दर के सार में से फूटकर निकलती हुई एक भाषा है बीज के अँकुराने की। तिनके बटोर-बटोरकर टहनियों के बीच घोंसला बुने जाने की भी एक भाषा है। तुम्हारे...
Gunahon Ka Devta - Dharmvir Bharti

धर्मवीर भारती – ‘गुनाहों का देवता’

धर्मवीर भारती के उपन्यास 'गुनाहों का देवता' से उद्धरण | Quotes from 'Gunahon Ka Devta', a novel by Dharmvir Bharti   "सचमुच लगता है कि प्रयाग...
Narendra Sharma

आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे

आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे? आज से दो प्रेम योगी, अब वियोगी ही रहेंगे! आज के बिछुड़े न जाने कब मिलेंगे? सत्य हो यदि, कल्प...
Pratibha Sharma

प्रेम का अबेकस (तीसरा भाग)

1 लड़कियाँ अपने प्रति क्रूर होती हैं बहुत क्रूर लड़कियाँ नाज़ुक हैं और उनकी प्रतिज्ञा भी नाज़ुक है इतनी आसानी से टूट जाती है सूखी फोग की टहनी की तरह पत्थरों...
Vijaydan Detha

लजवन्ती

किसी एक वक़्त की ढलान पर, क़ुदरत की गोद में एक गाँव बसा हुआ था। गाँव, गाँव के साँचे में ढला हुआ था। वे...
Nand Kishore Acharya

प्रेम-कविता

कोई शब्द विलोम नहीं होता किसी शब्द का वह अपना आप होता है जब तक बलात् तुम उसे दूसरे से भिड़ाओ नहीं कविता भिड़ाती नहीं साथ-साथ करती है शब्दों को —उनको भी विलोम...
Amrita Pritam

यह कहानी नहीं

अमृता प्रीतम की आत्मकथा 'अक्षरों के साये' से पत्थर और चूना बहुत था, लेकिन अगर थोड़ी-सी जगह पर दीवार की तरह उभरकर खड़ा हो जाता,...
Dharmvir Bharati

क्या इनका कोई अर्थ नहीं

ये शामें, सब की सब शामें जिनमें मैंने घबराकर तुमको याद किया जिनमें प्यासी सीपी-सा भटका विकल हिया जाने किस आने वाले की प्रत्याशा में ये शामें क्या इनका...
Gopaldas Neeraj

आदमी को प्यार दो

सूनी-सूनी ज़िन्दगी की राह है भटकी-भटकी हर नज़र-निगाह है राह को सँवार दो निगाह को निखार दो आदमी हो तुम कि उठो, आदमी को प्यार दो। दुलार दो। रोते हुए...
Kaifi Azmi

नज़राना

तुम परेशान न हो, बाब-ए-करम वा न करो और कुछ देर पुकारूँगा, चला जाऊँगा उसी कूचे में जहाँ चाँद उगा करते हैं शब-ए-तारीक गुज़ारूँगा, चला जाऊँगा रास्ता भूल...
Prabha Khaitan

मेरे और तुम्हारे बीच

'अपरिचित उजाले' से मेरे और तुम्हारे बीच अब वह नहीं रहा जिसे हम आज तक प्यार समझे जिए। प्यार तुम्हारी एक आदत महज़ जीने की सुविधा ठीक जैसे, मेज़, कुर्सी या अपनी...
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