Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Trilochan

तुम्हें जब मैंने देखा

पहले पहल तुम्हें जब मैंने देखा सोचा था इससे पहले ही सबसे पहले क्यों न तुम्हीं को देखा! अब तक दृष्टि खोजती क्या थी, कौन रूप, क्या रंग देखने को उड़ती थी ज्योति-पंख...
Shamsher Bahadur Singh

तुमको पाना है अविराम

'टूटी हुई बिखरी हुई' से तुमको पाना है, अविराम सब मिथ्याओं में, ओ मेरी सत्य! मुझसे दूर अलग न जाओ। मुझको छोड़ न दो कहीं मुझको छोड़ न दो तुम्हें मेरे...
Ibne Insha

ये बातें झूठी बातें हैं

ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलायी हैं तुम इंशा जी का नाम न लो क्या इंशा जी सौदाई हैं हैं लाखों रोग ज़माने में,...
Gopaldas Neeraj

प्यार की कहानी चाहिए

आदमी को आदमी बनाने के लिए ज़िन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए और कहने के लिए कहानी प्यार की स्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए। जो भी कुछ...
Agyeya

वेध्य

पहले मैं तुम्हें बताऊँगा अपनी देह का प्रत्येक मर्मस्थल फिर मैं अपने दहन की आग पर तपाकर तैयार करूँगा एक धारदार चमकीली कटार जो मैं तुम्हें दूँगा— फिर मैं अपने...
Prabha Khaitan

तुम जानते हो

'अपरिचित उजाले' से तुम जानते हो मैंने तुम्हें प्यार किया है साहस और निडरता से मैं उन सबके सामने खड़ी हूँ जिनकी आँखें हमारे सम्बन्धों पर प्रश्नवाचक मक्खियों की तरह...
Chandrakant Devtale

तुम वहाँ भी होंगी

अगर मुझे औरतों के बारे में कुछ पूछना हो तो मैं तुम्हें ही चुनूँगा तहक़ीक़ात के लिए यदि मुझे औरतों के बारे में कुछ कहना हो तो मैं...
Couple, Love, Waves, Abstract

जब कोई क्षण टूटता

वह मेरी सर्वत्रता था मैं उसका एकान्त— इस तरह हम कहीं भी अन्यत्र नहीं थे। जब कोई क्षण टूटता वहाँ होता एक अनन्तकालीन बोध उसके समयान्तर होने का मुझमें। जब कोई क्षण टूटता तब मेरा एकान्त आकाश नहीं एक छोटा-सा...
Hands, Touch

सृष्टि का पहला क्षण

मैंने दीवार को छुआ—वह दीवार ही रही। मौक़ा देखकर हिफ़ाज़त करती या रुकावट बनती। मैंने पेड़ को छुआ—वह पेड़ ही रहा। एक दिन ठूँठ बन जाने की...
Azra Abbas

तुम मुझे ढूँढते रहे

तुम मुझे ढूँढते रहे और मैं तुम्हें इस छुपन-छुपाई में हम ये ही भूल गए हम किसे ढूँढ रहे थे एक बार हम रास्ते में मिले थे लेकिन तुमने मुझे...
Vidrohi

इक आग का दरिया है

विरह मिलन है, मिलन विरह है, मिलन विरह का, विरह मिलन का ही जीवन है। मैं कवि हूँ और तीन-तीन बहनों का भाई हूँ, हल्दी, दूब और गले की हँसुली...
Harivansh Rai Bachchan

गरमी में प्रातःकाल

मिलन यामिनी से  गरमी में प्रातःकाल पवन बेला से खेला करता जब तब याद तुम्‍हारी आती है। जब मन से लाखों बार गया- आया सुख सपनों का मेला, जब मैंने घोर...
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