Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
तुम्हें जब मैंने देखा
पहले पहल तुम्हें जब मैंने देखा
सोचा था
इससे पहले ही
सबसे पहले
क्यों न तुम्हीं को देखा!
अब तक
दृष्टि खोजती क्या थी,
कौन रूप, क्या रंग
देखने को उड़ती थी
ज्योति-पंख...
तुमको पाना है अविराम
'टूटी हुई बिखरी हुई' से
तुमको पाना है, अविराम
सब मिथ्याओं में,
ओ मेरी सत्य!
मुझसे दूर अलग न जाओ।
मुझको छोड़ न दो
कहीं मुझको छोड़ न दो
तुम्हें मेरे...
ये बातें झूठी बातें हैं
ये बातें झूठी बातें हैं, ये लोगों ने फैलायी हैं
तुम इंशा जी का नाम न लो क्या इंशा जी सौदाई हैं
हैं लाखों रोग ज़माने में,...
प्यार की कहानी चाहिए
आदमी को आदमी बनाने के लिए
ज़िन्दगी में प्यार की कहानी चाहिए
और कहने के लिए कहानी प्यार की
स्याही नहीं, आँखों वाला पानी चाहिए।
जो भी कुछ...
वेध्य
पहले
मैं तुम्हें बताऊँगा अपनी देह का प्रत्येक मर्मस्थल
फिर मैं अपने दहन की आग पर तपाकर
तैयार करूँगा एक धारदार चमकीली कटार
जो मैं तुम्हें दूँगा—
फिर मैं
अपने...
तुम जानते हो
'अपरिचित उजाले' से
तुम जानते हो
मैंने तुम्हें प्यार किया है
साहस और निडरता से
मैं उन सबके सामने खड़ी हूँ
जिनकी आँखें
हमारे सम्बन्धों पर प्रश्नवाचक मक्खियों की तरह...
तुम वहाँ भी होंगी
अगर मुझे औरतों के बारे में
कुछ पूछना हो तो मैं तुम्हें ही चुनूँगा
तहक़ीक़ात के लिए
यदि मुझे औरतों के बारे में
कुछ कहना हो तो मैं...
जब कोई क्षण टूटता
वह
मेरी सर्वत्रता था
मैं
उसका एकान्त—
इस तरह हम
कहीं भी अन्यत्र नहीं थे।
जब
कोई क्षण टूटता
वहाँ होता
एक अनन्तकालीन बोध
उसके समयान्तर होने का
मुझमें।
जब
कोई क्षण टूटता
तब मेरा एकान्त
आकाश नहीं
एक छोटा-सा...
सृष्टि का पहला क्षण
मैंने दीवार को छुआ—वह दीवार ही रही। मौक़ा
देखकर हिफ़ाज़त करती या रुकावट बनती।
मैंने पेड़ को छुआ—वह पेड़ ही रहा। एक दिन
ठूँठ बन जाने की...
तुम मुझे ढूँढते रहे
तुम मुझे ढूँढते रहे
और मैं तुम्हें
इस छुपन-छुपाई में
हम ये ही भूल गए
हम किसे ढूँढ रहे थे
एक बार हम रास्ते में मिले थे
लेकिन तुमने मुझे...
इक आग का दरिया है
विरह मिलन है,
मिलन विरह है,
मिलन विरह का,
विरह मिलन का ही जीवन है।
मैं कवि हूँ
और तीन-तीन बहनों का भाई हूँ,
हल्दी, दूब और गले की हँसुली...
गरमी में प्रातःकाल
मिलन यामिनी से
गरमी में प्रातःकाल पवन
बेला से खेला करता जब
तब याद तुम्हारी आती है।
जब मन से लाखों बार गया-
आया सुख सपनों का मेला,
जब मैंने घोर...











