Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Rajendra Yadav

प्रतीक्षा

बहुत बार एक ही अवस्था से गुज़र चुकने पर लोग उसके अभ्यस्त हो जाते हैं। लेकिन गीता के साथ ऐसा नहीं है, और प्रतीक्षा...
Nirmala Putul

कुछ भी तो बचा नहीं सके तुम

तुम्हारे पास थोड़ा-सा वक़्त है... अगर नहीं तो निकालो थोड़ी फ़ुर्सत याद करो अपने उन तमाम पत्रों को जिससे बहुत कुछ बचाने की बात करते रहे हो...
Gyanendrapati

तुम्हारे वक्ष-कक्ष में

तुम्हारे वक्ष-कक्ष में जो होतीं सुलह-वार्ताएँ इज़रायल-फ़िलिस्तीन की भारत-पाकिस्तान की इराक़-अमरीका की हठी सरकारों और उग्र पृथकतावादियों की तुम्हारी छाती के अन्दर है जो एक गोल मेज़, उसके चौगिर्द बैठ जो वहाँ...
Woman with dupatta

अभी

अभी मैं प्रेम से भरी हुई हूँ पूरी दुनिया शिशु-सी लगती है मैं दे सकती हूँ किसी को कुछ भी रात-दिन वर्ष-पल अनन्त अभी तारे मेरी आँखों में...
Moon

एक तारा-विज्ञानी का प्रेम

उसे चाँद ख़ूबसूरत लगता है जबकि मुझे लुभाती हैं तारों की क़तारें तारे मेरी रोज़ी हैं जब अंधेरी रात में तारे खिलें और मेरी दूरबीन के पहलू में गिरें तो...
Yellow Flower, Offering, Sorry, Apology

मन करता है

झर जाते हैं शब्द हृदय में पंखुरियों-से उन्हें समेटूँ, तुमको दे दूँ मन करता है गहरे नीले नर्म गुलाबी पीले सुर्ख़ लाल कितने ही रंग हृदय में झलक रहे हैं उन्हें सजाकर तुम्हें...
Ashok Vajpeyi

प्यार करते हुए सूर्य-स्मरण

यह कविता यहाँ सुनें: https://youtu.be/yUBaa56oly8 जब मेरे होठों पर तुम्हारे होंठों की परछाइयाँ झुक आती हैं और मेरी उँगलियाँ तुम्हारी उँगलियों की धूप में तपने लगती हैं तब सिर्फ़ आँखें हैं जो...
Agyeya

उधार

सवेरे उठा तो धूप खिलकर छा गई थी और एक चिड़िया अभी-अभी गा गई थी। मैंने धूप से कहा : मुझे थोड़ी गरमाई दोगी उधार? चिड़िया से...
Anurag Tiwari

विदा

'अभी जिया नहीं' से विदा का शब्दों से निकलकर जब स्मृतियों में अस्तित्व हो जाता है दूर होना किसी किताब का बेमानी शब्द-सा रह जाता है किसी का...
Vijay Sharma

घोष बाबू और उनकी माँ

"हम यहाँ से निकलकर कहाँ जाएँगे?" — शिल्पा ने अनिमेष के कंधे पर सिर रक्खे कहा। "जहाँ क़िस्मत ले जाए!" — अनिमेष की आवाज़ में...
Hands. Separation

कभी न लौटने के लिए मत जाना

सुनो! जब जाना तो इस तरह मत जाना कि कभी लौट न सको उन्हीं रास्तों पर वापस जाते हुए गिराते जाना रास्ते में ख़त का पुर्ज़ा, कोई...
Faiz Ahmad Faiz

इस वक़्त तो यूँ लगता है

इस वक़्त तो यूँ लगता है, अब कुछ भी नहीं है महताब न सूरज, न अँधेरा न सवेरा आँखों के दरीचों पे किसी हुस्न की चिलमन और...
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