उसे चाँद ख़ूबसूरत लगता है
जबकि मुझे लुभाती हैं
तारों की क़तारें

तारे मेरी रोज़ी हैं
जब अंधेरी रात में तारे खिलें
और मेरी दूरबीन के पहलू में गिरें
तो ही आगे बढ़ पाया मेरा काम
मेरे बैंक अकाउंट की गुल्लक में
सारे सिक्के तारों ने ही डाले हैं

और चाँद?
वह एक आवारा घुसपैठिया है
चाँद के आगे तारे
फीके पड़ जाते हैं
जो तारे पहले ही बहुत धुंधले हैं,
वे दूरबीन से भी नज़र नहीं आते हैं

चाँदनी, तारों के खेत में
चिड़ियों जैसी है
मेरी फ़सल को चट कर जाती है

तारों की ही नेमत‌‌‌‌ हैं
सगाई की अँगूठी
और आर्टिफ़िशियल सस्ता हार
मेरा उसे दिया हर उपहार

मेरा कवि कभी और
ले लेगा
चाँद से
कवियों वाले बिम्ब उधार

काश,
कम-अज़-कम
एक बार
वह चाँद को कह दे—
“चाँद, थोड़ा कम नज़र आया करो!”

देवेश पथ सारिया की कविता 'ईश्वर (?) को नसीहत'

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देवेश पथ सारिया
हिंदी कवि। कथेतर गद्य लेखन एवं कविताओं के अनुवाद में भी सक्रिय। सम्प्रति: ताइवान में खगोल शास्त्र में पोस्ट डाक्टरल शोधार्थी। मूल रूप से राजस्थान के राजगढ़ (अलवर) से सम्बन्ध। साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशन: हंस, नया ज्ञानोदय, वागर्थ, कथादेश, कथाक्रम, परिकथा, पाखी, आजकल, बनास जन, मधुमती, कादंबिनी, समयांतर, समावर्तन, जनपथ, नया पथ, कथा, साखी, अकार, आधारशिला, बया, उद्भावना, दोआबा, बहुमत, परिंदे, प्रगतिशील वसुधा, शुक्रवार साहित्यिक वार्षिकी, कविता बिहान, गाँव के लोग, ककसाड़, अक्षर पर्व, निकट, मंतव्य, मुक्तांचल, उम्मीद, विश्वगाथा, गगनांचल, रेतपथ, कृति ओर, अनुगूँज, प्राची, कला समय, पुष्पगंधा आदि । समाचार पत्रों में प्रकाशन: राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, प्रभात ख़बर, दि सन्डे पोस्ट। वेब प्रकाशन: सदानीरा, जानकीपुल, हिंदवी, कविता कोश, पोषम पा, हिन्दीनेस्ट, इंद्रधनुष, अनुनाद, बिजूका, पहली बार, समकालीन जनमत, मीमांसा, शब्दांकन, कारवां, हमारा मोर्चा, साहित्यिकी, द साहित्यग्राम, लिटरेचर पॉइंट, अथाई, हिन्दीनामा।