Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
आमादगी
एक-इक ईंट गिरी पड़ी है
सब दीवारें काँप रही हैं
अन-थक कोशिशें मेमारों की
सर को थामे हाँफ रही हैं
मोटे-मोटे शहतीरों का
रेशा-रेशा छूट गया है
भारी-भारी जामिद पत्थर
एक-इक करके...
फूल लड़ाई
लोग
रौशनी से डरते हैं
सच से कतराते हैं
टेसू कहाँ फूलें?
देह
देह के आ जाने को डरती है
कोहबर घर से कतराती है
गुलाब कहाँ उगें?
गीत के पोखर
आदमी से...
वही नहीं
शाम होने पर
पक्षी लौटते हैं
पर वही नहीं जो गए थे
रात होने पर फिर से जल उठती है
दीपशिखा
पर वही नहीं जो कल बुझ गयी थी
सूखी...
भूल पाने की लड़ाई
उसे भूलने की लड़ाई
लड़ता रहता हूँ
यह लड़ाई भी
दूसरी कठिन लड़ाइयों जैसी है
दुर्गम पथ जाते हैं उस ओर
उसके साथ गुज़ारे
दिनों के भीतर से
उठती आती है...
तुम हँसी हो
तुम हँसी हो—जो न मेरे होंठ पर दीखे,
मुझे हर मोड़ पर मिलती रही है।
धूप—मुझ पर जो न छायी हो,
किंतु जिसकी ओर
मेरे रुद्ध जीवन की कुटी...
तुम पुकार दो
दिन ढला
पक्षी लौट रहे अपने-अपने नीड़
सूर्य का रथ अस्ताचल की ओर,
वह नहीं आयी।
उसकी प्रतीक्षा में फिर फिर लौटा उसका नाम
कण्ठ शून्य में पुकार, निराशा...
कविताएँ: अक्टूबर 2020
किसी रोज़
किसी रोज़
हाँ, किसी रोज़
मैं वापस आऊँगा ज़रूर
अपने मौसम के साथ
तुम देखना
मुझ पर खिले होंगे फूल
उगी होंगी हरी पत्तियाँ
लदे होंगे फल
मैं सीखकर आऊँगा
चिड़ियों की...
प्रेम की कोई जगह
रवीश कुमार की किताब 'बोलना ही है' से
हर कोई इश्क़ में नहीं होता है और न हर किसी में इश्क़ करने का साहस होता...
अक्टूबर
यह अक्टूबर फिर से बीतने को है
साल-दर-साल इस महीने के साथ
तुम बीत जाती हो
एक बार पूरा बीतकर भी
फिर वहीं से शुरू हो जाता है...
तुम्हारी आँखें
ज्वार से लबालब समुद्र जैसी तुम्हारी आँखें
मुझे देख रही हैं
और जैसे झील में टपकती हैं ओस की बूँदें
तुम्हारे चेहरे की परछाईं मुझमें प्रतिक्षण
और यह सिलसिला...
रसप्रिया
धूल में पड़े क़ीमती पत्थर को देखकर जौहरी की आँखों में एक नयी झलक झिलमिला गई—अपरूप-रूप!
चरवाहा मोहना छौंड़ा को देखते ही पँचकौड़ी मिरदंगिया की...
‘शहर में गाँव’ से नज़्में
यहाँ प्रस्तुत सभी नज़्में निदा फ़ाज़ली के सम्पूर्ण काव्य-संकलन 'शहर में गाँव' से ली गई हैं। यह संकलन मध्य-प्रदेश उर्दू अकादमी, भोपाल के योगदान...











