Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Akhtar ul Iman

आमादगी

एक-इक ईंट गिरी पड़ी है सब दीवारें काँप रही हैं अन-थक कोशिशें मेमारों की सर को थामे हाँफ रही हैं मोटे-मोटे शहतीरों का रेशा-रेशा छूट गया है भारी-भारी जामिद पत्थर एक-इक करके...
Ramnaresh Pathak

फूल लड़ाई

लोग रौशनी से डरते हैं सच से कतराते हैं टेसू कहाँ फूलें? देह देह के आ जाने को डरती है कोहबर घर से कतराती है गुलाब कहाँ उगें? गीत के पोखर आदमी से...
Ashok Vajpeyi

वही नहीं

शाम होने पर पक्षी लौटते हैं पर वही नहीं जो गए थे रात होने पर फिर से जल उठती है दीपशिखा पर वही नहीं जो कल बुझ गयी थी सूखी...
Alok Dhanwa

भूल पाने की लड़ाई

उसे भूलने की लड़ाई लड़ता रहता हूँ यह लड़ाई भी दूसरी कठिन लड़ाइयों जैसी है दुर्गम पथ जाते हैं उस ओर उसके साथ गुज़ारे दिनों के भीतर से उठती आती है...
Agyeya

तुम हँसी हो

तुम हँसी हो—जो न मेरे होंठ पर दीखे, मुझे हर मोड़ पर मिलती रही है। धूप—मुझ पर जो न छायी हो, किंतु जिसकी ओर मेरे रुद्ध जीवन की कुटी...
Morning, Sky, Birds, Sunrise, Sunset

तुम पुकार दो

दिन ढला पक्षी लौट रहे अपने-अपने नीड़ सूर्य का रथ अस्ताचल की ओर, वह नहीं आयी। उसकी प्रतीक्षा में फिर फिर लौटा उसका नाम कण्ठ शून्य में पुकार, निराशा...
Gaurav Bharti

कविताएँ: अक्टूबर 2020

किसी रोज़ किसी रोज़ हाँ, किसी रोज़ मैं वापस आऊँगा ज़रूर अपने मौसम के साथ तुम देखना मुझ पर खिले होंगे फूल उगी होंगी हरी पत्तियाँ लदे होंगे फल मैं सीखकर आऊँगा चिड़ियों की...
Bolna Hi Hai - Ravish Kumar

प्रेम की कोई जगह

रवीश कुमार की किताब 'बोलना ही है' से हर कोई इश्क़ में नहीं होता है और न हर किसी में इश्क़ करने का साहस होता...
Leaf, Autumn, Plant

अक्टूबर

यह अक्टूबर फिर से बीतने को है साल-दर-साल इस महीने के साथ तुम बीत जाती हो एक बार पूरा बीतकर भी फिर वहीं से शुरू हो जाता है...
Chandrakant Devtale

तुम्हारी आँखें

ज्वार से लबालब समुद्र जैसी तुम्हारी आँखें मुझे देख रही हैं और जैसे झील में टपकती हैं ओस की बूँदें तुम्हारे चेहरे की परछाईं मुझमें प्रतिक्षण और यह सिलसिला...
Phanishwarnath Renu

रसप्रिया

धूल में पड़े क़ीमती पत्थर को देखकर जौहरी की आँखों में एक नयी झलक झिलमिला गई—अपरूप-रूप! चरवाहा मोहना छौंड़ा को देखते ही पँचकौड़ी मिरदंगिया की...
Nida Fazli

‘शहर में गाँव’ से नज़्में

यहाँ प्रस्तुत सभी नज़्में निदा फ़ाज़ली के सम्पूर्ण काव्य-संकलन 'शहर में गाँव' से ली गई हैं। यह संकलन मध्य-प्रदेश उर्दू अकादमी, भोपाल के योगदान...
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