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Tag: प्रेम
कविताएँ: दिसम्बर 2020
1
हॉस्टल के अधिकांश कमरों के बाहर
लटके हुए हैं ताले
लटकते हुए इन तालों में
मैं आने वाला समय देख रहा हूँ
मैं देख रहा हूँ
कमरों के भीतर
अनियन्त्रित...
मेरे देखने से, प्रेम में असफल लड़के पर कविता
मेरे देखने से
मैंने देखा
तो नीला हो गया आकाश,
झूमने लगे पीपल के चमकते हरे पत्ते।
मैंने देखा
तो सफ़ेद बर्फ़ से ढँका
भव्य पहाड़
एकदम से उग आया
क्षितिज पर।
मैंने...
हाथ
1
यह सुख भी असह्य हो जाएगा
यह पूरे संसार का
जैसे एक फूल में सिमटकर
हाथ में आ जाना
यह एक तिनके का उड़ना
घोंसले का सपना बनकर
आकाश में
यह...
मीनाक्षी जोशी की कविताएँ
मध्यरात्रि का स्वप्न
तुम मेरे लिए
एक पुच्छल तारा हो
जिसे जब भी देखती हूँ
तो लगता है यह कहीं
आख़िरी बार तो नहीं!
फिर अपनी पलकों के टूटे हुए
एक बाल...
उस स्त्री का प्रेम
वह स्त्री पता नहीं कहाँ होगी
जिसने मुझसे कहा था—
वे तमाम स्त्रियाँ जो कभी तुम्हें प्यार करेंगी
मेरे भीतर से निकलकर आयी होंगी
और तुम जो प्रेम मुझसे...
सुन्दर बातें
जब हम मिले थे
वह समय भी अजीब था
शहर में दंगा था
कोई कहीं आ-जा नहीं सकता था
एक-दूसरे को वर्षों से जानने वाले लोग
एक-दूसरे को अब...
आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी
आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी
रात गहरी है मगर चाँद चमकता है अभी
मेरे माथे पे तेरा प्यार दमकता है अभी
मेरी साँसों में तेरा लम्स...
मृत्यु को नींद कहूँगा
अंतिम कविता
मृत्यु पर नहीं लिखूँगा
लिखूँगा जीवन पर
'अंधेरा है' को कहूँगा 'प्रकाश की अनुपस्थिति-भर'
धोखे के क्षणों में याद करूँगा बारिश, हवा, सूरज
मेरे अंदर जन्मती घृणा को
बारिश...
तुम साथ देते तो
तुम साथ देते तो मैं—
सात समुन्द्रों को पीने की ललक
अगस्त्य मुनी से
छीन लाती,
ब्रह्माण्ड में धरती-सी घूम-घूम
अपने अक्ष पर
तुम्हारे गिर्द घूमने का
दम भरती,
शनि और मंगल के...
हम-तुम
जीवन कभी सूना न हो
कुछ मैं कहूँ, कुछ तुम कहो।
तुमने मुझे अपना लिया
यह तो बड़ा अच्छा किया,
जिस सत्य से मैं दूर था
वह पास तुमने...
‘कहीं नहीं वहीं’ से कविताएँ
'कहीं नहीं वहीं' से कविताएँ
सिर्फ़ नहीं
नहीं, सिर्फ़ आत्मा ही नहीं झुलसेगी
प्रेम में
देह भी झुलस जाएगी
उसकी आँच से
नहीं, सिर्फ़ देह ही नहीं जलेगी
अन्त्येष्टि में
आत्मा भी...
समय और तुम
समय सफ़ेद करता है
तुम्हारी एक लट
तुम्हारी हथेली में लगी हुई मेंहदी को
खींचकर
उससे रंगता है तुम्हारे केश
समय तुम्हारे सर में
भरता है
समुद्र—उफ़न उठने वाला अधकपारी का...











