Tag: प्रेम

Read here the best Hindi Love Poems and Stories

Gaurav Bharti

कविताएँ: दिसम्बर 2020

1 हॉस्टल के अधिकांश कमरों के बाहर लटके हुए हैं ताले लटकते हुए इन तालों में मैं आने वाला समय देख रहा हूँ मैं देख रहा हूँ कमरों के भीतर अनियन्त्रित...
Man sitting seaside, Beach, Water

मेरे देखने से, प्रेम में असफल लड़के पर कविता

मेरे देखने से मैंने देखा तो नीला हो गया आकाश, झूमने लगे पीपल के चमकते हरे पत्ते। मैंने देखा तो सफ़ेद बर्फ़ से ढँका भव्य पहाड़ एकदम से उग आया क्षितिज पर। मैंने...
Ashok Vajpeyi

हाथ

1 यह सुख भी असह्य हो जाएगा यह पूरे संसार का जैसे एक फूल में सिमटकर हाथ में आ जाना यह एक तिनके का उड़ना घोंसले का सपना बनकर आकाश में यह...
Meenakshi Joshi

मीनाक्षी जोशी की कविताएँ

मध्यरात्रि का स्वप्न तुम मेरे लिए एक पुच्छल तारा हो जिसे जब भी देखती हूँ तो लगता है यह कहीं आख़िरी बार तो नहीं! फिर अपनी पलकों के टूटे हुए एक बाल...
Mangalesh Dabral

उस स्त्री का प्रेम

वह स्त्री पता नहीं कहाँ होगी जिसने मुझसे कहा था— वे तमाम स्त्रियाँ जो कभी तुम्हें प्यार करेंगी मेरे भीतर से निकलकर आयी होंगी और तुम जो प्रेम मुझसे...
Giving Flower, Love, Joy, Happiness, Flower

सुन्दर बातें

जब हम मिले थे वह समय भी अजीब था शहर में दंगा था कोई कहीं आ-जा नहीं सकता था एक-दूसरे को वर्षों से जानने वाले लोग एक-दूसरे को अब...
Parveen Shakir

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी

आज की शब तो किसी तौर गुज़र जाएगी रात गहरी है मगर चाँद चमकता है अभी मेरे माथे पे तेरा प्यार दमकता है अभी मेरी साँसों में तेरा लम्स...
Man, Peace

मृत्यु को नींद कहूँगा

अंतिम कविता मृत्यु पर नहीं लिखूँगा लिखूँगा जीवन पर 'अंधेरा है' को कहूँगा 'प्रकाश की अनुपस्थिति-भर' धोखे के क्षणों में याद करूँगा बारिश, हवा, सूरज मेरे अंदर जन्मती घृणा को बारिश...
Ramnika Gupta

तुम साथ देते तो

तुम साथ देते तो मैं— सात समुन्द्रों को पीने की ललक अगस्त्य मुनी से छीन लाती, ब्रह्माण्ड में धरती-सी घूम-घूम अपने अक्ष पर तुम्हारे गिर्द घूमने का दम भरती, शनि और मंगल के...
Hands, Love, Couple

हम-तुम

जीवन कभी सूना न हो कुछ मैं कहूँ, कुछ तुम कहो। तुमने मुझे अपना लिया यह तो बड़ा अच्छा किया, जिस सत्य से मैं दूर था वह पास तुमने...
Ashok Vajpeyi

‘कहीं नहीं वहीं’ से कविताएँ

'कहीं नहीं वहीं' से कविताएँ सिर्फ़ नहीं नहीं, सिर्फ़ आत्मा ही नहीं झुलसेगी प्रेम में देह भी झुलस जाएगी उसकी आँच से नहीं, सिर्फ़ देह ही नहीं जलेगी अन्त्येष्टि में आत्मा भी...
Gyanendrapati

समय और तुम

समय सफ़ेद करता है तुम्हारी एक लट तुम्हारी हथेली में लगी हुई मेंहदी को खींचकर उससे रंगता है तुम्हारे केश समय तुम्हारे सर में भरता है समुद्र—उफ़न उठने वाला अधकपारी का...
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