Read here the best Hindi Love Poems and Stories
Tag: प्रेम
फ़क़त चन्द लम्हे
बहुत देर है
बस के आने में
आओ
कहीं पास की लॉन पर बैठ जाएँ
चटखता है मेरी भी रग-रग में सूरज
बहुत देर से तुम भी चुप-चुप खड़ी...
प्यार करता हूँ
माथे की आँच से
डोरा सुलगता है
मोम नहीं गलता
देह बन्द नदिया
उफनाती है
नीली फिर काली फिर श्वेत हो जाती है
दार्शनिक उँगलियों से
चितकबरे फूल नहीं
झरती है राख
असहाय होता...
आत्मा की आवाज़
मैं अपना काम ख़त्म करके वापस घर आ गया था। घर में कोई परदा करने वाला तो नहीं था, पर बड़ी झिझक लग रही...
अधिक प्रिय वजह
शरीर में दिल है
सो धड़कता है
मगर इन दिनों
वजह दूसरी है
धरती पर कोई है
जिसके होने की आहट से
यह धड़कने लगता है
क्या अब ऐसा होगा
कि शरीर...
फिर आऊँगा
मैं फिर आऊँगा
भले ही जन्मान्तर के बाद
तुम्हारे ही पास।
मैं झगड़ा करूँगा
देवताओं से
और नक्षत्रों की बाधाएँ पार करके
सुबह खिड़की पर अकस्मात् आए
दूर देश के पक्षी...
तुम ही थीं न
मैं इलाक़े के आख़िरी छोर पर
झंखाड़ की तरह उगा था
तुम मेरी आस्तीन में
नीला फूल बनकर खिली थीं
तुम ही थीं
जिसने तितली की शक्ल में
डुबोया था मुझे...
प्यार
प्यार था
मुस्कान में, चुप्पी में
यहाँ तक कि खिड़की में भी प्यार था!
अंधेरे में काँपता
छाया की तरह धूप में
सावधान करता
राहों के ख़तरों से बार-बार
प्यार था।
झरता...
प्यार
पुराने टूटे ट्रकों के पीछे मैंने किया प्यार
कई बार तो उनमें घुसकर
लतरों से भरे कबाड़ में जगह निकालते
शाम को अपना परदा बनाते हुए
अक्सर ही...
धातुओं का गलता सच
हमारा प्यार—
सफ़ेद बादल नहीं
जिसे हवा चाहे जिधर
उड़ा ले जाए,
अब वह धातुओं में गलता सच है
जिसकी बंदिशें
वक़्त के सीने पर
उभरी दिखती हैं
जैसे रेत में सफ़ेद...
आज मैं तुम्हारा हूँ
कल मेरे प्राणों में कोई रो रहा था। बाहर सब शान्त था। भीतर-भीतर भारी व्यथा भर गई थी। जी बड़ा उदास था। कौन-सी हवा...
अन्तर
बस से उतरकर वह बाज़ार के चौराहे पर खड़ा हो गया। सामने टाउन हॉल की इमारत थी—लम्बी और भयावह। पहली मंज़िल पर लम्बी, मैली...
ऐसी तो कोई बात नहीं
तुमसे भी छिपा सकूँ जो मैं
ऐसी तो कोई बात नहीं जीवन में।
मन दिया तुम्हें मैंने ही अपने मन से
रंग दिया तुम्हें मैंने अपने जीवन...











